लेखांकन के लिए प्रतिशत: लाभ %, बट्टा, GST और ब्याज
- किसी भी राशि का प्रतिशत जल्दी निकालो
- क्रय मूल्य पर लाभ % और हानि % निकालो
- व्यापारिक बट्टा और नकद बट्टा निकालो, और बट्टे के बाद वाले मूल्य पर GST (CGST + SGST या IGST)
- वर्षों और महीनों के लिए साधारण ब्याज निकालो
लेखाशास्त्र गणित का विषय नहीं है, पर यह एक गणितीय औज़ार बार-बार इस्तेमाल करता है: प्रतिशत। बट्टा % में, GST % में, ब्याज % में, अध्याय 7 का मूल्यह्रास भी % में, और बोर्ड के कई प्रश्न चुपचाप यही जाँचते हैं कि तुम ये हिसाब बिना ग़लती के कर पाते हो या नहीं। आज हम ठीक वही प्रतिशत के हिसाब करेंगे जो एक लेखाकार रोज़ करता है, और उसी क्रम में जिसमें वे असली बिल पर होते हैं। पाठ के अंत तक GST का बिल तुम्हें डराएगा नहीं।
1. प्रतिशत यानी "100 में से"
10% का मतलब है हर 100 में से 10। तो ₹500 का 10% यानी: हर ₹100 में से ₹10 लो, और पाँच सौ हैं, तो ₹50।
किसी राशि का x% = राशि × x100
- ₹25,000 × 12100
- = 250 × 12
मन में जल्दी हिसाब की तरकीबें: 10% = दशमलव एक स्थान बाएँ (₹6,400 का 10% = ₹640)। 5% = 10% का आधा। 1% = दो स्थान बाएँ। 18% = 10% + 5% + 3 × 1%। तो ₹6,400 का 18% = 640 + 320 + 192 = ₹1,152।
2. लाभ % और हानि %
₹200 का लाभ अच्छा लगता है, पर किस राशि पर? ₹800 की चीज़ पर ₹200 लाभ बढ़िया है; ₹80,000 की चीज़ पर बहुत कम। इसलिए लाभ को क्रय मूल्य के प्रतिशत में बताते हैं।
लाभ % = लाभक्रय मूल्य × 100
हानि % = हानिक्रय मूल्य × 100
- लाभ = ₹1,000 − ₹800 = ₹200
- लाभ % = 200800 × 100
लाभ % क्रय मूल्य पर निकलता है, विक्रय मूल्य पर नहीं (जब तक प्रश्न साफ़ न कहे "विक्रय पर लाभ")। यहाँ 2001000 × 100 = 20% ग़लत होगा।
- हानि = ₹900 − ₹720 = ₹180
- हानि % = 180900 × 100
एक घड़ी का क्रय मूल्य ₹1,200 है और वह ₹1,500 में बिकती है। लाभ % निकालो (सिर्फ़ संख्या लिखो)।
3. बट्टा: व्यापारिक बट्टा और नकद बट्टा
बट्टा (Discount) यानी दाम में छूट। लेखांकन में इसके दो प्रकार हैं, और दोनों के साथ बिल्कुल अलग व्यवहार होता है।
| व्यापारिक बट्टा (Trade discount) | नकद बट्टा (Cash discount) | |
|---|---|---|
| क्यों दिया जाता है | थोक ख़रीद को बढ़ावा देने या व्यापार के सामान्य रिवाज़ के रूप में | ख़रीदार जल्दी (नियत तिथि पर या पहले) भुगतान करे, इसलिए |
| किस पर | सूची मूल्य (कैटलॉग मूल्य) पर, बिक्री के समय | देय राशि पर, भुगतान के समय |
| खातों में? | दर्ज नहीं होता। सिर्फ़ शुद्ध राशि लिखी जाती है | दर्ज होता है: दिया गया बट्टा (विक्रेता) / प्राप्त बट्टा (ख़रीदार) |
गुप्ता होलसेलर्स के कैटलॉग में रजिस्टरों के एक कार्टन का दाम ₹20,000 है। शर्मा जी नियमित रूप से थोक में ख़रीदते हैं, इसलिए गुप्ता बिल पर ही 10% कम कर देते हैं: यह व्यापारिक बट्टा है। अलग से गुप्ता कहते हैं, "7 दिन में भुगतान करोगे तो 2% कम ले लूँगा।" यह नकद बट्टा है। पहला बिल बदलता है; दूसरा सिर्फ़ भुगतान।
- व्यापारिक बट्टा = ₹20,000 का 10% = ₹2,000
- शुद्ध मूल्य = ₹20,000 − ₹2,000 = ₹18,000
- नकद बट्टा = ₹5,000 का 2% = ₹100
- प्राप्त नकदी = ₹5,000 − ₹100 = ₹4,900
एक स्टील अलमारी का सूची मूल्य ₹15,000 है। डीलर 20% व्यापारिक बट्टा देता है। शुद्ध मूल्य (₹ में) कितना है?
4. GST: लगभग हर बिल पर लगने वाला कर
GST (माल एवं सेवा कर) (Goods and Services Tax) भारत में माल और सेवाओं की आपूर्ति पर लगने वाला कर है। विक्रेता इसे ख़रीदार से वसूलता है और सरकार के पास जमा करता है। दर वस्तु पर निर्भर है, जैसे 5%, 12%, 18% या 28% (दरें GST परिषद तय करती है)।
4.1 कौन-सा GST: CGST + SGST या IGST?
- राज्य के भीतर आपूर्ति (विक्रेता और ख़रीदार एक ही राज्य में, जैसे खुर्जा से अलीगढ़): दर दो बराबर हिस्सों में बँटती है, CGST (केंद्रीय GST) और SGST (राज्य GST)। 18% = 9% CGST + 9% SGST।
- अंतर-राज्यीय आपूर्ति (विक्रेता और ख़रीदार अलग-अलग राज्यों में, जैसे दिल्ली से खुर्जा): पूरी दर IGST (एकीकृत GST) के रूप में लगती है। 18% IGST।
एक राज्य → दो हिस्से (C + S)। अलग राज्य → एक "I"। "I" का मतलब Integrated है, इसे "Inter-state" से याद रखो।
4.2 बिल पर सही क्रम
सूची मूल्य → घटाओ व्यापारिक बट्टा → कर योग्य मूल्य → जोड़ो कर योग्य मूल्य पर GST → बिल का कुल योग।
- व्यापारिक बट्टा = ₹2,000, तो कर योग्य मूल्य = ₹18,000।
- दिल्ली से उ.प्र. अंतर-राज्यीय है, इसलिए IGST लगेगा।
- IGST = ₹18,000 का 18% = ₹3,240।
- बिल का कुल = ₹18,000 + ₹3,240 = ₹21,240।
GST व्यापारिक बट्टे के बाद वाले मूल्य पर लगता है, सूची मूल्य पर कभी नहीं। ऊपर के उदाहरण में ₹20,000 का 18% = ₹3,600 ग़लत होगा।
व्यापारी के लिए ख़रीद पर चुकाया GST आगत (Input) GST और बिक्री पर वसूला GST निर्गत (Output) GST कहलाता है। व्यापारी सरकार को सिर्फ़ अंतर (निर्गत − आगत) चुकाता है। यह तुम अध्याय 3 में आगत CGST खाता और निर्गत SGST खाता जैसे खातों से दर्ज करोगे।
जयपुर (राजस्थान) का एक आपूर्तिकर्ता अलीगढ़ (उ.प्र.) के व्यापारी को ₹8,000 का माल बेचता है। GST दर 5% है। कितना IGST लगेगा (₹ में)?
- IGST ₹1,800
- CGST ₹900 + SGST ₹900
- CGST ₹1,800 + SGST ₹1,800
- सिर्फ़ SGST ₹1,800
5. साधारण ब्याज
जब व्यापार ऋण लेता है, तो वह ब्याज (Interest) चुकाता है। जब वह पैसा उधार देता है या सावधि जमा (FD) रखता है, तो ब्याज कमाता है। कक्षा 11 में साधारण ब्याज का प्रयोग होता है।
साधारण ब्याज = P × R × T100
P = मूलधन (ऋण की राशि) · R = दर % प्रति वर्ष · T = समय वर्षों में
अगर समय महीनों में हो, तो उसे वर्ष की भिन्न में लिखो: 6 महीने = 612 वर्ष, 9 महीने = 912 वर्ष।
- 1 जुलाई से 31 मार्च तक = 9 महीने = 912 वर्ष।
- ब्याज = ₹50,000 × 12100 × 912
- = ₹6,000 × 912 = ₹4,500
9 महीने के लिए T = 9 मत रखो। दर प्रति वर्ष है, इसलिए समय भी वर्षों में होना चाहिए। T = 9 से ₹54,000 आएगा, जो ऋण से भी ज़्यादा है। हमेशा देखो कि उत्तर समझदारी भरा है या नहीं।
एक व्यापारी 10% वार्षिक दर पर 6 महीने के लिए ₹30,000 उधार देता है। ब्याज (₹ में) निकालो।
6. आगे की झलक: मूल्यह्रास में प्रतिशत
मशीन, फर्नीचर और कंप्यूटर इस्तेमाल से अपना मूल्य खोते हैं। अध्याय 7 में तुम प्रतिशत के रूप में मूल्यह्रास (Depreciation) लगाओगे। अभी सिर्फ़ हिसाब देखो: ₹60,000 की मशीन पर 9% वार्षिक मूल्यह्रास हो तो एक वर्ष में ₹60,000 × 9100 = ₹5,400 कम होंगे। वही प्रतिशत का हुनर, नया नाम।
- व्यापारिक बट्टा, खातों में दर्ज नहीं होता
- GST
- ब्याज
- नकद बट्टा, खातों में दर्ज होता है
📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)
- किसी राशि का x% = राशि × x ÷ 100; 10%, 5%, 1% की तरकीबें इसे तेज़ बनाती हैं।
- लाभ % और हानि % हमेशा क्रय मूल्य पर, जब तक कुछ और न कहा जाए।
- व्यापारिक बट्टा सूची मूल्य पर होता है और दर्ज नहीं होता; नकद बट्टा जल्दी भुगतान पर होता है और दर्ज होता है।
- GST व्यापारिक बट्टे के बाद वाले मूल्य पर: एक राज्य = CGST + SGST (आधा-आधा), अलग राज्य = IGST।
- साधारण ब्याज = P × R × T ÷ 100, T वर्षों में (महीने ÷ 12)।
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