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अध्याय 3 · पाठ 4 / 6 · ⏱ 35 मिनट

रोज़नामचा: वह बही जिसमें हर लेन-देन सबसे पहले लिखा जाता है

🎯 इस पाठ के बाद आप यह कर पाओगे:
  • समझ पाओगे कि रोज़नामचे को प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक क्यों कहते हैं
  • सही प्रारूप में साधारण और संयुक्त प्रविष्टियाँ लिख पाओगे
  • परिसंपत्तियों और देयताओं की सूची से प्रारंभिक प्रविष्टि कर पाओगे
  • निजी प्रयोग के लिए माल, बट्टा, डूबत ऋण और बकाया व्यय जैसी विशेष प्रविष्टियाँ कर पाओगे

अब तक तुमने सीखा कि कौन-सा खाता नाम करना है और कौन-सा जमा। आज सीखोगे कि इसे कहाँ लिखना है। व्यवसाय का हर लेन-देन सबसे पहले एक बही में लिखा जाता है, जिसे रोज़नामचा (Journal) कहते हैं। अगर रोज़नामचा पक्का हो गया, तो कक्षा 11 के लेखाशास्त्र का 60–70% भाग आसान हो जाता है, क्योंकि रोकड़ बही, खाता बही, तलपट और संशोधन सब यहीं से शुरू होते हैं। हम धीरे-धीरे चलेंगे: पहले प्रारूप, फिर साधारण प्रविष्टियाँ, फिर संयुक्त प्रविष्टियाँ, फिर प्रारंभिक प्रविष्टि, और अंत में वे "विशेष" प्रविष्टियाँ जो परीक्षकों को बहुत पसंद हैं।

1. रोज़नामचे की ज़रूरत क्यों?

विकास शर्मा अलीगढ़ में शर्मा स्टेशनरी मार्ट चलाते हैं। पहले हफ़्ते में वे कागज़ खरीदते हैं, कॉपियाँ बेचते हैं, UPI से किराया देते हैं और एक स्कूल से पैसे लेते हैं। अगर वे बिल बस दराज़ में रख दें, तो महीने भर बाद कोई नहीं बता पाएगा कि किस दिन क्या हुआ। इसलिए हर शाम वे एक रजिस्टर खोलते हैं और हर लेन-देन को तिथि के क्रम में लिखते हैं: कौन-सा खाता नाम होगा, कौन-सा जमा, राशि कितनी और एक पंक्ति का विवरण। यही रजिस्टर उनका रोज़नामचा है।

पिछले पाठों में तुमने देखा कि हर लेन-देन कम से कम दो खातों पर असर डालता है। असली लेखांकन प्रणाली सीधे उन खातों में नहीं कूदती। पहले हर लेन-देन को स्रोत प्रलेख (Source document) (कैश मेमो, बीजक, UPI रसीद, प्रमाणक) के आधार पर तिथि के क्रम में एक बही में लिखा जाता है। इससे हर लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड एक जगह मिलता है, और उसका नाम तथा जमा पक्ष साथ-साथ दिखते हैं।

रोज़नामचा: वह बही जिसमें लेन-देन पहली बार, तिथिवार (कालक्रम में) लिखे जाते हैं। इसे प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक (Book of original entry) भी कहते हैं।

रोज़नामचा बनाना (Journalising): लेन-देन को रोज़नामचे में लिखने की प्रक्रिया।

बाद में हर प्रविष्टि को रोज़नामचे से खाता बही (Ledger) (प्रधान पुस्तक) के अलग-अलग खातों में ले जाया जाता है। इस स्थानांतरण को खतौनी (Posting) कहते हैं; यह तुम पाठ 6 में सीखोगे।

बड़े व्यवसायों में हज़ारों एक जैसे लेन-देन होते हैं, इसलिए रोज़नामचे को कई प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तकों में बाँट दिया जाता है: मुख्य रोज़नामचा, रोकड़ बही, और क्रय बही, विक्रय बही, क्रय वापसी बही, विक्रय वापसी बही, प्राप्य बिल बही और देय बिल बही जैसी दैनिक बहियाँ। इन्हें तुम अध्याय 4 में पढ़ोगे। इस अध्याय में हम हर चीज़ के लिए एक ही साधारण रोज़नामचा प्रयोग करेंगे।

2. रोज़नामचे का प्रारूप

रोज़नामचे के पन्ने में पाँच खाने होते हैं:

तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 1
रोकड़ खाता नाम1,20,000
पूँजी खाते से1,20,000
(व्यापार रोकड़ से प्रारंभ किया)
  1. तिथि: जिस दिन लेन-देन हुआ (वह दिन नहीं जिस दिन तुमने लिखा)। वर्ष ऊपर एक बार लिखा जाता है, महीना तब जब वह बदले।
  2. विवरण: पहली पंक्ति = नाम होने वाला खाता, बाएँ किनारे से शुरू, और खाने के अंत में "नाम" (Dr.) लिखा जाता है। दूसरी पंक्ति = जमा होने वाला खाता, थोड़ा दाईं ओर हटाकर, "…से" (To) के साथ। इनके नीचे कोष्ठक में एक पंक्ति की व्याख्या, जिसे संक्षिप्त विवरण (Narration) कहते हैं। संक्षिप्त विवरण के बाद एक रेखा खींची जाती है, जो बताती है कि यह प्रविष्टि पूरी हुई।
  3. ब.पृ.सं. (बही पृष्ठ संख्या) (L.F., Ledger Folio): खाता बही का वह पृष्ठ जहाँ वह खाता रखा है। यह प्रविष्टि लिखते समय नहीं, खतौनी के समय भरा जाता है। परीक्षा के ज़्यादातर उत्तरों में यह खाली रहता है।
  4. नाम राशि: नाम होने वाले खाते के सामने की राशि।
  5. जमा राशि: जमा होने वाले खाते के सामने की राशि।

जब पन्ना भर जाता है, तो दोनों राशि-खानों का जोड़ योग आगे ले गए (c/f) के रूप में लिखा जाता है; अगला पन्ना उन्हीं आँकड़ों से योग आगे लाए (b/f) के रूप में शुरू होता है। अंत में दोनों खानों का कुल योग बराबर होना चाहिए।

"नाम पहले, अंत में 'नाम'; जमा बाद में, आगे 'से'।" नाम वाला खाता हमेशा पहले और बाईं ओर लिखा जाता है; जमा वाला खाता उसके बाद, दाईं ओर खिसकाकर, "…से" के साथ।

3. कोई भी प्रविष्टि लिखने से पहले कैसे सोचें

हर बार यही तीन सवाल पूछो:

  1. कौन-से दो (या अधिक) खाते प्रभावित हो रहे हैं?
  2. हर खाता किस प्रकार का है: परिसंपत्ति, देयता, पूँजी, आगम या व्यय?
  3. वह बढ़ रहा है या घट रहा है? फिर नियम लगाओ: परिसंपत्तियाँ और व्यय नाम पक्ष में बढ़ते हैं; देयताएँ, पूँजी और आगम जमा पक्ष में बढ़ते हैं।

जब माल (जिसका तुम व्यापार करते हो) खरीदा जाता है, तो क्रय खाता नाम होता है, "माल खाता" नहीं। जब माल बेचा जाता है, तो विक्रय खाता जमा होता है। माल खाते को पाँच खातों में बाँटा जाता है: क्रय, विक्रय, क्रय वापसी, विक्रय वापसी और स्टॉक। पर दुकान में प्रयोग के लिए खरीदा गया फर्नीचर, कंप्यूटर या मशीन माल का क्रय नहीं है; फर्नीचर खाता, कंप्यूटर खाता या मशीनरी खाता नाम करो।

शब्दों को ध्यान से पढ़ो। "रवि से माल खरीदा" (नकद का ज़िक्र नहीं) का अर्थ है उधार क्रय, इसलिए रवि का खाता जमा करो। "रवि से नकद माल खरीदा" का अर्थ है रोकड़ गई, इसलिए रोकड़ खाता जमा करो; रवि का नाम आएगा ही नहीं। UPI, चेक, डेबिट कार्ड या NEFT से भुगतान बैंक खाते से होता है।

4. साधारण प्रविष्टियाँ

साधारण प्रविष्टि (Simple entry) में केवल दो खाते होते हैं: एक नाम और एक जमा।

शर्मा स्टेशनरी मार्ट के अप्रैल 2026 के निम्न लेन-देनों की रोज़नामचा प्रविष्टियाँ करो:
अप्रैल 1 विकास शर्मा ने ₹1,20,000 रोकड़ से व्यापार शुरू किया।
अप्रैल 2 SBI में बैंक खाता खोलकर ₹50,000 जमा किए।
अप्रैल 4 गुप्ता पेपर हाउस से ₹30,000 का माल खरीदा।
अप्रैल 6 ₹8,000 का माल नकद बेचा।
अप्रैल 9 मीना को ₹6,500 का माल बेचा।
अप्रैल 12 UPI से दुकान का किराया ₹7,000 चुकाया।
अप्रैल 15 मीना से UPI द्वारा ₹6,500 मिले।
अप्रैल 30 सहायक को ₹9,000 वेतन नकद दिया।
  1. पहले हर लेन-देन का विश्लेषण करो:
    तिथिखाते और प्रकारप्रभावनाम / जमा
    अप्रैल 1रोकड़ (परिसंपत्ति), पूँजीरोकड़ ↑, पूँजी ↑रोकड़ नाम, पूँजी जमा
    अप्रैल 2बैंक (परिसंपत्ति), रोकड़ (परिसंपत्ति)बैंक ↑, रोकड़ ↓बैंक नाम, रोकड़ जमा
    अप्रैल 4क्रय (व्यय), गुप्ता पेपर हाउस (देयता)दोनों ↑क्रय नाम, गुप्ता पेपर हाउस जमा
    अप्रैल 6रोकड़ (परिसंपत्ति), विक्रय (आगम)दोनों ↑रोकड़ नाम, विक्रय जमा
    अप्रैल 9मीना (परिसंपत्ति: देनदार), विक्रय (आगम)दोनों ↑मीना नाम, विक्रय जमा
    अप्रैल 12किराया (व्यय), बैंक (परिसंपत्ति)किराया ↑, बैंक ↓किराया नाम, बैंक जमा
    अप्रैल 15बैंक (परिसंपत्ति), मीना (परिसंपत्ति)बैंक ↑, मीना ↓बैंक नाम, मीना जमा
    अप्रैल 30वेतन (व्यय), रोकड़ (परिसंपत्ति)वेतन ↑, रोकड़ ↓वेतन नाम, रोकड़ जमा
  2. अब हर प्रविष्टि को संक्षिप्त विवरण के साथ रोज़नामचे के प्रारूप में लिखो, और दोनों खानों का योग करो।

शर्मा स्टेशनरी मार्ट का रोज़नामचा

तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 1
रोकड़ खाता नाम1,20,000
पूँजी खाते से1,20,000
(व्यापार रोकड़ से प्रारंभ किया)
अप्रैल 2बैंक खाता नाम50,000
रोकड़ खाते से50,000
(SBI में रोकड़ जमा की)
अप्रैल 4क्रय खाता नाम30,000
गुप्ता पेपर हाउस के खाते से30,000
(उधार माल खरीदा)
अप्रैल 6रोकड़ खाता नाम8,000
विक्रय खाते से8,000
(नकद माल बेचा)
अप्रैल 9मीना का खाता नाम6,500
विक्रय खाते से6,500
(मीना को उधार माल बेचा)
अप्रैल 12किराया खाता नाम7,000
बैंक खाते से7,000
(UPI से दुकान का किराया चुकाया)
अप्रैल 15बैंक खाता नाम6,500
मीना के खाते से6,500
(मीना से UPI द्वारा राशि प्राप्त हुई)
अप्रैल 30वेतन खाता नाम9,000
रोकड़ खाते से9,000
(सहायक को वेतन दिया)
योग2,37,0002,37,000

अप्रैल 15 को बहुत से छात्र फिर से विक्रय खाता जमा कर देते हैं। नहीं! विक्रय तो अप्रैल 9 को लिखा जा चुका है। अब मीना केवल अपना बकाया चुका रही है, इसलिए उसका खाता जमा होगा (देनदार घटता है)।

अप्रैल 18: दुकान का ₹2,400 का बिजली बिल UPI से चुकाया।

बिजली एक व्यय है। UPI से भुगतान करने पर कौन-सी परिसंपत्ति घटी?
व्यय (बिजली) बढ़ा → नाम। UPI भुगतान से बैंक शेष घटा → बैंक जमा।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 18
बिजली खाता नाम2,400
बैंक खाते से2,400
(UPI से बिजली बिल चुकाया)

अप्रैल 20: कपूर ब्रदर्स से ₹18,000 का माल खरीदा।

नकद का कोई ज़िक्र नहीं है। इससे क्या पता चलता है?
"कपूर ब्रदर्स से माल खरीदा", नकद के बिना = उधार क्रय। क्रय खाता नाम होगा ("माल खाता" नहीं) और आपूर्तिकर्ता, जो अब लेनदार है, जमा होगा।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 20
क्रय खाता नाम18,000
कपूर ब्रदर्स के खाते से18,000
(उधार माल खरीदा)

5. संयुक्त प्रविष्टियाँ

जब दो से अधिक खाते शामिल हों (दो या अधिक नाम, या दो या अधिक जमा), तो प्रविष्टि संयुक्त प्रविष्टि (Compound entry) कहलाती है। नियम नहीं बदलता: कुल नाम = कुल जमा।

अप्रैल 22: शर्मा स्टेशनरी मार्ट ने डिजिटल वर्ल्ड से कार्यालय के प्रयोग के लिए ₹45,000 का कंप्यूटर खरीदा। ₹15,000 UPI से चुकाए और बाकी बाद में देने हैं।
  1. कंप्यूटर (परिसंपत्ति) ₹45,000 बढ़ा → कंप्यूटर खाता ₹45,000 नाम।
  2. बैंक (परिसंपत्ति) ₹15,000 घटा → बैंक खाता ₹15,000 जमा।
  3. डिजिटल वर्ल्ड 45,000 − 15,000 = ₹30,000 का लेनदार बना → डिजिटल वर्ल्ड का खाता ₹30,000 जमा।
  4. जाँच: नाम 45,000 = जमा 15,000 + 30,000 ✔
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 22
कंप्यूटर खाता नाम45,000
बैंक खाते से15,000
डिजिटल वर्ल्ड के खाते से30,000
(कंप्यूटर खरीदा, आंशिक भुगतान UPI से, शेष बकाया)

नकद बट्टा (Cash discount) वह छोटी छूट है जो जल्दी भुगतान करने पर मिलती है। जो इसे देता है, उसके लिए यह व्यय है (दिया गया बट्टा खाता, नाम); जो इसे पाता है, उसके लिए यह अभिलाभ है (प्राप्त बट्टा खाता, जमा)। व्यापारिक बट्टा (Trade discount) (बिक्री के समय सूची मूल्य पर दी गई छूट) कभी नहीं लिखा जाता; हम सीधे शुद्ध राशि लिखते हैं।

अप्रैल 25: अनिल से उसके ₹10,000 के खाते के पूर्ण भुगतान में ₹9,800 नकद मिले।
  1. "पूर्ण भुगतान" का अर्थ है अनिल का पूरा ₹10,000 अब साफ़ हो गया → अनिल का खाता ₹10,000 जमा।
  2. असल में मिली रोकड़ ₹9,800 → रोकड़ खाता ₹9,800 नाम।
  3. जो ₹200 हमने छोड़ दिए, वह हमारी हानि है → दिया गया बट्टा खाता ₹200 नाम।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 25
रोकड़ खाता नाम9,800
दिया गया बट्टा खाता नाम200
अनिल के खाते से10,000
(अनिल से पूर्ण भुगतान में रोकड़ मिली, बट्टा दिया)

अप्रैल 28: गुप्ता पेपर हाउस को उनके ₹30,000 के खाते के पूर्ण भुगतान में ₹29,400 का चेक दिया। (एक नाम, दो जमा।)

लेनदार का पूरा ₹30,000 साफ़ हो गया। बैंक से कम गया। ₹600 का लाभ किसे हुआ?
लेनदार ₹30,000 घटा → गुप्ता पेपर हाउस नाम। बैंक ₹29,400 घटा → बैंक जमा। हमें ₹600 का लाभ → प्राप्त बट्टा जमा।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 28
गुप्ता पेपर हाउस का खाता नाम30,000
बैंक खाते से29,400
प्राप्त बट्टा खाते से600
(पूर्ण भुगतान में चेक दिया, बट्टा प्राप्त हुआ)

6. प्रारंभिक प्रविष्टि

जो व्यवसाय पहले से चल रहा है, वह नया वर्ष कुछ शेषों के साथ शुरू करता है: रोकड़, बैंक, स्टॉक, देनदार, फर्नीचर, लेनदार, ऋण। पिछले वर्ष के ये अंतिम शेष एक संयुक्त प्रविष्टि से नई पुस्तकों में लाए जाते हैं, जिसे प्रारंभिक प्रविष्टि (Opening entry) कहते हैं।

प्रारंभिक प्रविष्टि: सभी परिसंपत्तियाँ नाम करो, सभी देयताएँ जमा करो, और अंतर से पूँजी खाता जमा करो।

पूँजी = कुल परिसंपत्तियाँ − कुल देयताएँ

1 अप्रैल 2026 को शर्मा स्टेशनरी मार्ट की पुस्तकों में ये शेष हैं: रोकड़ ₹15,000, बैंक ₹60,000, स्टॉक ₹45,000, फर्नीचर ₹30,000, राकेश (देनदार) ₹10,000 और सुनील (लेनदार) ₹20,000। प्रारंभिक प्रविष्टि करो।
  1. कुल परिसंपत्तियाँ = 15,000 + 60,000 + 45,000 + 30,000 + 10,000 = ₹1,60,000
  2. कुल देयताएँ = ₹20,000 (सुनील)
  3. पूँजी = 1,60,000 − 20,000 = ₹1,40,000
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 1
रोकड़ खाता नाम15,000
बैंक खाता नाम60,000
स्टॉक खाता नाम45,000
फर्नीचर खाता नाम30,000
राकेश का खाता नाम10,000
सुनील के खाते से20,000
पूँजी खाते से (अंतर की राशि)1,40,000
(पिछले वर्ष के शेष आगे लाए)
योग1,60,0001,60,000

1 अप्रैल 2026 को एक मोबाइल स्टोर के पास है: रोकड़ ₹8,000, बैंक ₹42,000, स्टॉक ₹30,000, देनदार ₹20,000, लेनदार ₹15,000 और ₹25,000 का बैंक ऋण। प्रारंभिक प्रविष्टि में पूँजी खाते में कितनी राशि जमा होगी?

पूँजी = परिसंपत्तियाँ − देयताएँ। बैंक ऋण एक देयता है।
परिसंपत्तियाँ = 8,000 + 42,000 + 30,000 + 20,000 = ₹1,00,000। देयताएँ = 15,000 + 25,000 = ₹40,000। पूँजी = 1,00,000 − 40,000 = ₹60,000।

7. वे विशेष प्रविष्टियाँ जो परीक्षकों को पसंद हैं

ये पहली बार में अजीब लगती हैं, पर हर एक उन्हीं नियमों पर चलती है। प्रविष्टि रटो मत, उसका तर्क समझो।

लेन-देनप्रविष्टिक्यों
मालिक घर के प्रयोग के लिए माल ले जाता हैआहरण खाता नाम, क्रय खाते सेपूँजी घटती है (आहरण); बेचने के लिए खरीदा माल घटता है
माल दान में दियादान खाता नाम, क्रय खाते सेदान एक व्यय है; माल व्यवसाय से बाहर गया
माल निःशुल्क नमूने के रूप में बाँटाविज्ञापन खाता नाम, क्रय खाते सेनमूने विज्ञापन का एक तरीका हैं
माल आग से नष्ट हुआआग से हानि खाता नाम, क्रय खाते सेहानि नाम होती है
मालिक निजी प्रयोग के लिए रोकड़ निकालता हैआहरण खाता नाम, रोकड़ खाते सेपूँजी घटती है; रोकड़ घटती है
किसी देनदार की राशि वसूल नहीं हो सकतीडूबत ऋण खाता नाम, देनदार के खाते सेहानि ↑; देनदार (परिसंपत्ति) ↓
पहले अपलिखित डूबत ऋण वसूल हुआरोकड़ खाता नाम, डूबत ऋण वसूली खाते सेअभिलाभ ↑ (देनदार का खाता पहले ही बंद हो चुका)
वेतन देय है पर चुकाया नहीं (बकाया)वेतन खाता नाम, बकाया वेतन खाते सेव्यय ↑; देयता ↑
बीमा अग्रिम चुकाया (पूर्वदत्त)पूर्वदत्त बीमा खाता नाम, रोकड़ खाते सेपूर्वदत्त व्यय एक परिसंपत्ति है
कमीशन अग्रिम मिलारोकड़ खाता नाम, अग्रिम प्राप्त कमीशन खाते सेजो आय अभी कमाई नहीं गई, वह देयता है
मशीनरी पर मूल्यह्रासमूल्यह्रास खाता नाम, मशीनरी खाते सेव्यय ↑; परिसंपत्ति का मूल्य ↓
मालिक को पूँजी पर ब्याज दियापूँजी पर ब्याज खाता नाम, पूँजी खाते सेव्यवसाय के लिए व्यय; मालिक की पूँजी ↑
नई मशीन की स्थापना पर रोकड़ चुकाईमशीनरी खाता नाम, रोकड़ खाते सेस्थापना परिसंपत्ति की लागत का भाग है

जब भी माल बिक्री के बिना व्यवसाय से बाहर जाए (घर का प्रयोग, दान, नमूने, आग), तो क्रय खाता लागत मूल्य पर जमा करो, विक्रय खाता कभी नहीं।

रोहित, जिस पर व्यवसाय के ₹5,000 बकाया थे, दिवालिया हो गया (अपने ऋण नहीं चुका सकता)। उसकी संपत्ति से रुपये में 60 पैसे नकद मिलते हैं। प्रविष्टि करो।
  1. "रुपये में 60 पैसे" का अर्थ है हर ₹1 के बदले ₹0.60: 5,000 × 0.60 = ₹3,000 मिले।
  2. बाकी 5,000 − 3,000 = ₹2,000 कभी नहीं आएँगे → डूबत ऋण।
  3. रोहित का पूरा ₹5,000 का खाता बंद होगा → रोहित का खाता ₹5,000 जमा।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
रोकड़ खाता नाम3,000
डूबत ऋण खाता नाम2,000
रोहित के खाते से5,000
(रोहित की संपत्ति से रुपये में 60 पैसे मिले, शेष अपलिखित)

विकास अपने बच्चों के लिए दुकान से ₹1,200 लागत की कॉपियाँ ले गए।

माल व्यवसाय से बाहर गया, पर बिक्री के ज़रिए नहीं।
मालिक द्वारा लिया गया माल = आहरण (नाम)। बिना बिक्री के बाहर गया माल → क्रय खाता लागत पर जमा।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
आहरण खाता नाम1,200
क्रय खाते से1,200
(स्वामी ने निजी प्रयोग के लिए माल लिया)

₹3,000 लागत के पेन स्कूल के छात्रों में निःशुल्क नमूने के रूप में बाँटे गए।

दुकानें निःशुल्क नमूने क्यों देती हैं?
निःशुल्क नमूने दुकान का प्रचार करते हैं, इसलिए यह विज्ञापन व्यय है। बिना बिक्री के माल बाहर गया → क्रय खाता जमा।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
विज्ञापन खाता नाम3,000
क्रय खाते से3,000
(माल निःशुल्क नमूने के रूप में बाँटा)

8. खेलो: रोज़नामचा खेल

अपनी रफ़्तार जाँचो। हर लेन-देन के लिए नाम और जमा खाते चुनो।

9. परीक्षा के सुझाव

  • बोर्ड परीक्षा में हर प्रविष्टि के साथ संक्षिप्त विवरण अपेक्षित है; इसे कोष्ठक में छोटा और साफ़ लिखो।
  • हर खाते के नाम के बाद "खाता" लिखो, और हर नाम पंक्ति पर "नाम" लिखो, संयुक्त प्रविष्टियों में भी।
  • अगर रोज़नामचा कई पन्नों में जाए, तो "योग आगे ले गए" और "योग आगे लाए" दिखाओ; अंत में कुल योग दो।
  • रोज़नामचा प्रश्नों में आमतौर पर हर सही प्रविष्टि के लिए 1 अंक मिलता है (संक्षिप्त विवरण उसी का भाग है)। साफ़ रेखाएँ और सही खिसकाव (इंडेंटेशन) मायने रखते हैं।
रोज़नामचे का ब.पृ.सं. (L.F.) खाना कब भरा जाता है?
  • जब लेन-देन होता है
  • जब प्रमाणक बनाया जाता है
  • जब प्रविष्टि की खाता बही में खतौनी की जाती है
  • जब तलपट बनाया जाता है
ब.पृ.सं. खाता बही की पृष्ठ संख्या है, इसलिए यह तभी लिखी जा सकती है जब प्रविष्टि की सच में खतौनी हो।
"निशा को ₹5,000 का माल बेचा।" सही प्रविष्टि है:
  • रोकड़ खाता नाम, विक्रय खाते से
  • निशा का खाता नाम, विक्रय खाते से
  • विक्रय खाता नाम, निशा के खाते से
  • निशा का खाता नाम, माल खाते से
नकद का ज़िक्र नहीं है, इसलिए यह उधार बिक्री है। निशा देनदार बनती है (परिसंपत्ति ↑, नाम) और विक्रय (आगम ↑) जमा होता है।

📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)

  • रोज़नामचा = प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक; लेन-देन तिथि के क्रम में लिखे जाते हैं; लिखने की प्रक्रिया रोज़नामचा बनाना कहलाती है।
  • प्रारूप: तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम | जमा। नाम पंक्ति के अंत में "नाम", जमा पंक्ति "…से" के साथ, फिर संक्षिप्त विवरण। ब.पृ.सं. खतौनी के समय भरा जाता है।
  • साधारण प्रविष्टि = दो खाते; संयुक्त प्रविष्टि = दो से अधिक, पर कुल नाम हमेशा कुल जमा के बराबर।
  • प्रारंभिक प्रविष्टि: सभी परिसंपत्तियाँ नाम, सभी देयताएँ जमा, और अंतर से पूँजी जमा।
  • बिना बिक्री के बाहर गया माल (आहरण, दान, नमूने, आग) क्रय खाते में लागत पर जमा होता है।
  • नकद बट्टा लिखा जाता है (दिया गया = व्यय, प्राप्त = अभिलाभ); व्यापारिक बट्टा कभी नहीं लिखा जाता।

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