₹AccountsDostकक्षा 11 · लेखाशास्त्र 🔥 0⭐ 0
अध्याय 3 · पाठ 3 / 6 · ⏱ 35 मिनट

नाम और जमा के नियम: कौन-सा पक्ष, और क्यों

🎯 इस पाठ के बाद आप यह कर पाओगे:
  • T-खाते की मदद से नाम और जमा का अर्थ समझा पाओगे
  • किसी भी खाते को परिसंपत्ति, देयता, पूँजी, व्यय/हानि या आगम/अभिलाभ में बाँट पाओगे
  • किसी भी लेन-देन पर नाम और जमा के नियम (लेखांकन समीकरण पद्धति) लगा पाओगे
  • व्यक्तिगत, वास्तविक और नाममात्र खातों के पारंपरिक सुनहरे नियमों से अपना उत्तर जाँच पाओगे

यह पूरी किताब का सबसे ज़रूरी पाठ है। आज के नियम समझ आ गए, तो रोज़नामचा, खाता बही, रोकड़ बही, तलपट — इसके बाद का सब कुछ बस अभ्यास है। ज़्यादातर विद्यार्थी यहाँ सिर्फ़ इसलिए अटकते हैं क्योंकि किसी ने उन्हें बताया था "नाम मतलब पैसा आया" या "जमा मतलब अच्छा"। वह सब भूल जाओ। आज तुम देखोगे कि नाम का मतलब बस बायाँ पक्ष है और जमा का मतलब बस दायाँ पक्ष, और कौन-सा पक्ष लगाना है इसका नियम सीधे उसी लेखांकन समीकरण से आता है जो पिछले पाठ में सीखा। पाठ के अंत तक तुम किसी भी लेन-देन का नाम और जमा लगभग दस सेकंड में तय कर पाओगे।

1. T-खाता: बायाँ पक्ष और दायाँ पक्ष

व्यापार की हर मद (रोकड़, फर्नीचर, कोई सप्लायर, किराया) का अपना अलग रिकॉर्ड होता है जिसे खाता (Account) कहते हैं। अपने सबसे सरल रूप में खाता अंग्रेज़ी के बड़े अक्षर T जैसा दिखता है: ऊपर शीर्षक, एक बायाँ पक्ष और एक दायाँ पक्ष।

रोकड़ खाता
बायाँ पक्ष = नाम (Dr.)दायाँ पक्ष = जमा (Cr.)
यहाँ लिखी राशि "नाम" की जाती हैयहाँ लिखी राशि "जमा" की जाती है

नाम (Debit, Dr.) का अर्थ है किसी खाते के बाएँ पक्ष में राशि लिखना। जमा (Credit, Cr.) का अर्थ है दाएँ पक्ष में राशि लिखना। ये शब्द अपने आप में वृद्धि, कमी, अच्छा या बुरा नहीं बताते।

दो पक्ष क्यों? ताकि वृद्धि एक ओर और कमी दूसरी ओर लिखी जा सके। किसी भी समय दोनों पक्षों का अंतर (शेष (Balance)) बताता है कि वह मद कहाँ खड़ी है। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक के खाते में उसे बेचा गया माल नाम पक्ष में और उससे मिला पैसा जमा पक्ष में जाता है; अंतर वह राशि है जो उस पर अभी बाकी है।

रजनी एंटरप्राइजेज़ (एक ग्राहक) ने ₹35,000 का और बाद में ₹12,000 का माल उधार खरीदा। उसने ₹30,000 चुकाए। रजनी एंटरप्राइजेज़ पर अभी कितना बाकी है?

नाम पक्ष का जोड़ घटा जमा पक्ष का जोड़।
नाम पक्ष (बेचा गया माल) = 35,000 + 12,000 = 47,000। जमा पक्ष (भुगतान) = 30,000। शेष = 47,000 − 30,000 = ₹17,000 अभी बाकी।

2. खातों के पाँच प्रकार

लेखा करने के लिए हर खाता पाँच समूहों में से किसी एक में आता है। पहले खाते को उसके समूह में रखना सीखो; नियम अपने आप आ जाएगा।

समूहअर्थउदाहरण
परिसंपत्तियाँव्यापार की अपनी चीज़ें या दूसरों पर व्यापार की बकाया राशियाँरोकड़, बैंक, फर्नीचर, मशीनरी, भवन, स्टॉक, देनदार (ग्राहक), पूर्वदत्त किराया
देयताएँबाहरी लोगों को व्यापार द्वारा देय राशियाँलेनदार (सप्लायर), बैंक ऋण, बकाया वेतन
पूँजीमालिक का दावापूँजी; आहरण (पूँजी घटाता है)
व्यय / हानियाँ (Expenses / Losses)आगम कमाने में खर्च हुई लागतें, और हानियाँमाल का क्रय, किराया, वेतन, मज़दूरी, बिजली, दिया गया बट्टा, आग से हानि
आगम / अभिलाभ (Revenues / Gains)व्यावसायिक गतिविधियों से कमाई गई आय, और अभिलाभविक्रय, प्राप्त कमीशन, प्राप्त ब्याज, प्राप्त किराया, प्राप्त बट्टा

ध्यान दो कि क्रय को व्यय खाता और विक्रय को आगम खाता माना जाता है। बहियों में माल एक ही "माल खाते" में नहीं रखा जाता। माल खाते को क्रय, विक्रय, क्रय वापसी, विक्रय वापसी और स्टॉक खातों में बाँट दिया जाता है। इसलिए माल खरीदने पर क्रय खाता नाम करो, "माल खाता" कभी नहीं।

3. नाम और जमा के नियम

ये नियम वैसे ही हैं जैसे NCERT देती है। याद रखने के लिए बस दो समूह हैं।

नियम 1 — परिसंपत्तियाँ और व्यय/हानियाँ:
वृद्धि नाम की जाती है; कमी जमा की जाती है।

नियम 2 — देयताएँ, पूँजी और आगम/अभिलाभ:
वृद्धि जमा की जाती है; कमी नाम की जाती है।

खाते का प्रकारवृद्धि (+)कमी (−)
परिसंपत्तिनामजमा
व्यय / हानिनामजमा
देयताजमानाम
पूँजीजमानाम
आगम / अभिलाभजमानाम

3.1 ये नियम क्यों? (ये A = L + C से आते हैं)

समीकरण देखो: परिसंपत्तियाँ बाईं ओर हैं; देयताएँ और पूँजी दाईं ओर।

  • परिसंपत्तियाँ समीकरण के बाईं ओर हैं, इसलिए वे अपने खाते के बाएँ (नाम) पक्ष में बढ़ती हैं।
  • देयताएँ और पूँजी समीकरण के दाईं ओर हैं, इसलिए वे दाएँ (जमा) पक्ष में बढ़ती हैं।
  • आगम पूँजी बढ़ाता है, इसलिए वह पूँजी जैसा व्यवहार करता है: वृद्धि = जमा।
  • व्यय और हानियाँ पूँजी घटाते हैं। पूँजी में कमी नाम होती है, इसलिए व्यय में वृद्धि = नाम।
  • आहरण भी पूँजी घटाता है, इसलिए आहरण नाम किया जाता है।

क्योंकि हर लेन-देन का समीकरण के दोनों पक्षों पर बराबर प्रभाव होता है, इसलिए कुल नाम हमेशा कुल जमा के बराबर होता है। दोहरा लेखा प्रणाली का पूरा विचार यही है।

"परि-व्यय बाएँ, दे-पूँ-आ दाएँ।" परिसंपत्तियाँ और व्यय बाएँ (नाम) बढ़ते हैं। देयताएँ, पूँजी और आगम दाएँ (जमा) बढ़ते हैं। कमी हमेशा उल्टे पक्ष में जाती है।

"नाम मतलब वृद्धि" गलत है। नाम परिसंपत्तियों और व्ययों को बढ़ाता है, पर देयताओं, पूँजी और आगम को घटाता है। लेनदार को भुगतान करने पर लेनदार का खाता नाम होता है क्योंकि देयता घटती है। हमेशा पूछो: कौन-सा समूह, और बढ़ा या घटा?

4. चार कदम वाली विधि

हर लेन-देन के लिए ये चार कदम चलो। अभ्यास से ये अपने आप होने लगेंगे।

  1. कौन-से खाते प्रभावित हैं? (कम से कम दो।)
  2. हर खाता किस समूह का है? (परिसंपत्ति, देयता, पूँजी, व्यय, आगम।)
  3. हर खाता बढ़ रहा है या घट रहा है?
  4. नियम लगाओ → नाम या जमा। जाँचो कि नाम = जमा।
काव्या मोबाइल स्टोर, अप्रैल 2026। नाम और जमा तय करो:
(a) काव्या ने ₹3,00,000 नकद से व्यापार शुरू किया।
(b) बैंक में ₹2,00,000 जमा किए।
(c) गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स से ₹90,000 के फ़ोन उधार खरीदे।
(d) ₹42,000 के फ़ोन नकद बेचे।
  1. (a) रोकड़ (परिसंपत्ति) ↑ → रोकड़ नाम। पूँजी ↑ → पूँजी जमा।
  2. (b) बैंक (परिसंपत्ति) ↑ → बैंक नाम। रोकड़ (परिसंपत्ति) ↓ → रोकड़ जमा।
  3. (c) क्रय (व्यय) ↑ → क्रय नाम। गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स (देयता, लेनदार) ↑ → गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स जमा।
  4. (d) रोकड़ (परिसंपत्ति) ↑ → रोकड़ नाम। विक्रय (आगम) ↑ → विक्रय जमा।
(a) रोकड़ नाम, पूँजी जमा   (b) बैंक नाम, रोकड़ जमा   (c) क्रय नाम, गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स जमा   (d) रोकड़ नाम, विक्रय जमा

पाठ 2 में समीकरण समझने के लिए हमने (d) की बिक्री को "स्टॉक लागत पर घटा, पूँजी लाभ से बढ़ी" के रूप में दिखाया था। असली बहियों में हम बस विक्रय खाते को पूरे विक्रय मूल्य से जमा करते हैं। लाभ साल के अंत में व्यापार खाता बनाते समय निकाला जाता है। बिक्री पर स्टॉक खाता या पूँजी खाता जमा मत करना।

4.1 पूरा महीना एक नज़र में

लेन-देन (₹)खाते और समूहप्रभावनामजमा
3,00,000 नकद से व्यापार शुरूरोकड़ (परिसंपत्ति); पूँजी↑ ; ↑रोकड़पूँजी
2,00,000 बैंक में जमाबैंक (परिसंपत्ति); रोकड़ (परिसंपत्ति)↑ ; ↓बैंकरोकड़
40,000 का फर्नीचर UPI सेफर्नीचर (परिसंपत्ति); बैंक (परिसंपत्ति)↑ ; ↓फर्नीचरबैंक
गैलेक्सी से 90,000 का माल उधारक्रय (व्यय); गैलेक्सी (देयता)↑ ; ↑क्रयगैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स
42,000 का माल नकद बेचारोकड़ (परिसंपत्ति); विक्रय (आगम)↑ ; ↑रोकड़विक्रय
रोहन को 26,000 का माल उधार बेचारोहन (परिसंपत्ति, देनदार); विक्रय (आगम)↑ ; ↑रोहनविक्रय
गैलेक्सी को 50,000 चेक से चुकाएगैलेक्सी (देयता); बैंक (परिसंपत्ति)↓ ; ↓गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्सबैंक
8,000 किराया नकद चुकायाकिराया (व्यय); रोकड़ (परिसंपत्ति)↑ ; ↓किरायारोकड़
निजी उपयोग हेतु 5,000 नकद निकालेआहरण (पूँजी घटाता है); रोकड़ (परिसंपत्ति)↑ ; ↓आहरणरोकड़
रोहन ने 16,000 UPI से चुकाएबैंक (परिसंपत्ति); रोहन (परिसंपत्ति, देनदार)↑ ; ↓बैंकरोहन

अब रोकड़ की हर मद को रोकड़ खाते में इकट्ठा करो। नाम (वृद्धि) बाईं ओर और जमा (कमी) दाईं ओर:

नामरोकड़ खाताजमा
तिथिविवरणरो.पृ.सं.₹तिथिविवरणरो.पृ.सं.₹
अप्रैल 1पूँजी खाते से3,00,000अप्रैल 2बैंक खाते द्वारा2,00,000
अप्रैल 10विक्रय खाते से42,000अप्रैल 25किराया खाते द्वारा8,000
अप्रैल 28आहरण खाते द्वारा5,000

ऊपर के रोकड़ खाते से बताओ, 30 अप्रैल 2026 को काव्या की दुकान में कितनी रोकड़ है?

नाम पक्ष जोड़ो, जमा पक्ष जोड़ो, घटाओ।
नाम पक्ष = 3,00,000 + 42,000 = 3,42,000। जमा पक्ष = 2,00,000 + 8,000 + 5,000 = 2,13,000। हाथ में रोकड़ = 3,42,000 − 2,13,000 = ₹1,29,000 — ठीक वही रोकड़ जो पाठ 2 में समीकरण से मिली थी।

5. अभ्यास: नाम और जमा चुनो

अप्रैल 25, 2026: दुकान का किराया ₹8,000 नकद चुकाया।

किराया एक व्यय है जो बढ़ रहा है। रोकड़ एक परिसंपत्ति है जो घट रही है।
किराया (व्यय) बढ़ा → नाम। रोकड़ (परिसंपत्ति) घटी → जमा। मकान-मालिक का खाता नाम नहीं होगा, क्योंकि भुगतान के बाद न उसे कुछ देना है न उससे कुछ लेना।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 25
किराया खाता नाम8,000
रोकड़ खाते से8,000
(दुकान का किराया नकद चुकाया)

अप्रैल 6, 2026: दोबारा बेचने के लिए गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स से ₹90,000 के मोबाइल फ़ोन उधार खरीदे।

दोबारा बेचने के लिए खरीदा माल एक खास व्यय खाते में जाता है। अब किसे पैसा देना है?
क्रय (व्यय) बढ़ा → क्रय खाता नाम ("माल" या "स्टॉक" नहीं)। गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स लेनदार बन गया, यानी देयता बढ़ी → जमा।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 6
क्रय खाता नाम90,000
गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स के खाते से90,000
(माल उधार खरीदा)

अप्रैल 28, 2026: काव्या ने घरेलू उपयोग के लिए दुकान से ₹5,000 नकद निकाले।

मालिक द्वारा निजी उपयोग के लिए लिया गया पैसा अपने अलग खाते में जाता है, जो पूँजी घटाता है।
आहरण पूँजी घटाता है, इसलिए आहरण खाता नाम होता है (सीधे पूँजी खाता नाम करने की जगह अलग खाता रखा जाता है)। रोकड़ (परिसंपत्ति) घटी → जमा। यह वेतन नहीं है, क्योंकि मालिक कर्मचारी नहीं है।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 28
आहरण खाता नाम5,000
रोकड़ खाते से5,000
(निजी उपयोग के लिए रोकड़ निकाली)

अप्रैल 12, 2026: सिंह इंजीनियरिंग से ₹60,000 की मशीन खरीदी; ₹10,000 नकद चुकाए और बाकी अभी देना है।

एक परिसंपत्ति आई। एक परिसंपत्ति घटी, और एक नई देयता बनी। यानी दो जमा।
मशीनरी (परिसंपत्ति) ↑ ₹60,000 → नाम। रोकड़ (परिसंपत्ति) ↓ ₹10,000 → जमा। सिंह इंजीनियरिंग (लेनदार, देयता) ↑ ₹50,000 → जमा। नाम 60,000 = जमा 10,000 + 50,000। मशीन उपयोग के लिए खरीदी है, बेचने के लिए नहीं, इसलिए यह क्रय नहीं है।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 12
मशीनरी खाता नाम60,000
रोकड़ खाते से10,000
सिंह इंजीनियरिंग के खाते से50,000
(मशीन खरीदी, आंशिक भुगतान नकद किया)

6. पारंपरिक पद्धति: सुनहरे नियम

लेखांकन समीकरण पद्धति के मानक बनने से पहले लेखाकार एक अलग वर्गीकरण इस्तेमाल करते थे। बहुत-से शिक्षक, Tally इस्तेमाल करने वाले और पुरानी किताबें आज भी इसे अपनाते हैं, और यह जाँचने का बहुत अच्छा तरीका है। खातों को तीन प्रकारों में बाँटा जाता है:

प्रकारइसमें क्या आता हैउदाहरण
व्यक्तिगत खाता (Personal account)व्यक्ति और संस्थाएँ: प्राकृतिक (लोग), कृत्रिम (फ़र्म, बैंक, कंपनियाँ, स्कूल) और प्रतिनिधि (किसी व्यक्ति की ओर से खड़े खाते, जैसे बकाया या पूर्वदत्त मदें)रोहन का खाता, गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स का खाता, बैंक खाता, पूँजी खाता, आहरण खाता, बकाया वेतन खाता, पूर्वदत्त किराया खाता
वास्तविक खाता (Real account)वस्तुएँ (संपत्ति) — मूर्त या अमूर्तरोकड़, फर्नीचर, मशीनरी, भवन, स्टॉक, ख्याति, पेटेंट
नाममात्र खाता (Nominal account)व्यय, हानियाँ, आय और अभिलाभकिराया, वेतन, क्रय, विक्रय, प्राप्त कमीशन, दिया गया बट्टा

सुनहरे नियम (Golden rules)

व्यक्तिगत खाता: पाने वाले को नाम करो, देने वाले को जमा करो।

वास्तविक खाता: जो आए उसे नाम करो, जो जाए उसे जमा करो।

नाममात्र खाता: सभी व्यय और हानियाँ नाम करो, सभी आय और अभिलाभ जमा करो।

काव्या के दो लेन-देन सुनहरे नियमों से जाँचो:
(a) गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स को चेक से ₹50,000 चुकाए।
(b) UPI से बैंक में ₹3,000 कमीशन मिला।
  1. (a) गैलेक्सी (व्यक्तिगत) पैसा पाता है → गैलेक्सी नाम। बैंक (व्यक्तिगत, कृत्रिम) पैसा देता है → बैंक जमा।
  2. आधुनिक जाँच: गैलेक्सी देयता है जो घटी → नाम; बैंक परिसंपत्ति है जो घटी → जमा। वही उत्तर।
  3. (b) बैंक (व्यक्तिगत) पाता है → बैंक नाम। प्राप्त कमीशन एक आय है (नाममात्र) → प्राप्त कमीशन जमा।
  4. आधुनिक जाँच: बैंक परिसंपत्ति ↑ → नाम; आगम ↑ → जमा। वही उत्तर।
(a) गैलेक्सी डिस्ट्रीब्यूटर्स नाम, बैंक जमा   (b) बैंक नाम, प्राप्त कमीशन जमा

अप्रैल 22, 2026: ₹3,000 कमीशन UPI से सीधे बैंक खाते में मिला।

बैंक शेष बढ़ा। कमाया गया कमीशन एक आय है।
बैंक (परिसंपत्ति) बढ़ा → नाम। प्राप्त कमीशन (आगम) बढ़ा → जमा। सुनहरे नियम भी यही कहते हैं: बैंक पाता है (व्यक्तिगत) और कमीशन आय है (नाममात्र)।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 22
बैंक खाता नाम3,000
प्राप्त कमीशन खाते से3,000
(UPI द्वारा कमीशन प्राप्त हुआ)

NCERT (CBSE) लेखांकन समीकरण पद्धति अपनाती है, इसलिए परीक्षा में कारण इन्हीं शब्दों में दो: "परिसंपत्ति में वृद्धि नाम की जाती है", "व्यय में वृद्धि नाम की जाती है", "देयता में वृद्धि जमा की जाती है"। सुनहरे नियम सिर्फ़ अपना उत्तर दोबारा जाँचने के लिए इस्तेमाल करो। दोनों पद्धतियाँ हमेशा एक ही नाम और जमा देती हैं।

मार्च का ₹12,000 वेतन 31 मार्च को अभी भी नहीं चुकाया गया। लेखांकन समीकरण पद्धति में "बकाया वेतन" खाता किस समूह का है?

व्यापार को यह पैसा कर्मचारी को देना है।
यह राशि व्यापार को किसी बाहरी व्यक्ति को देनी है, इसलिए यह देयता है। (पारंपरिक पद्धति में यह प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाता है।)
देयता में कमी को इस तरह लिखा जाता है:
  • जमा, क्योंकि देयताएँ जमा की जाती हैं
  • नाम, क्योंकि देयताएँ हमेशा नाम की जाती हैं
  • नाम, क्योंकि देयता में वृद्धि जमा और कमी नाम की जाती है
  • न नाम, न जमा
देयताएँ जमा पक्ष में बढ़ती हैं, इसलिए कमी उल्टे, यानी नाम पक्ष में जाती है। उदाहरण: लेनदार को भुगतान करने पर लेनदार का खाता नाम होता है।
मालिक जब निजी उपयोग के लिए रोकड़ लेता है, तो आहरण खाता नाम क्यों किया जाता है?
  • आहरण पूँजी घटाता है, और पूँजी में कमी नाम की जाती है
  • आहरण व्यापार का व्यय है
  • आहरण व्यापार की परिसंपत्तियाँ बढ़ाता है
  • आहरण व्यापार की देयता है
आहरण व्यापार का व्यय नहीं है; यह मालिक द्वारा अपने निवेश का कुछ हिस्सा वापस लेना है। इससे पूँजी घटती है, और पूँजी में कमी नाम होती है।

बोर्ड टिप: "क्या नाम का अर्थ हमेशा वृद्धि होता है?" (1–3 अंक) जैसे प्रश्नों में यह लिखो: "नहीं। नाम परिसंपत्तियों और व्ययों को बढ़ाता है, पर देयताओं, पूँजी और आगम को घटाता है", और हर एक का एक उदाहरण दो। "लेन-देन का विश्लेषण कीजिए" कहा जाए तो हर खाते के लिए समूह, परिवर्तन और नियम एक पंक्ति में लिखो, जैसे 4.1 की तालिका में।

📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)

  • नाम का अर्थ खाते का बायाँ पक्ष और जमा का अर्थ दायाँ पक्ष है; कोई भी शब्द अपने आप "वृद्धि" नहीं बताता।
  • पाँच समूह: परिसंपत्तियाँ, देयताएँ, पूँजी, व्यय/हानियाँ, आगम/अभिलाभ।
  • परिसंपत्तियाँ और व्यय: वृद्धि = नाम, कमी = जमा। देयताएँ, पूँजी और आगम: वृद्धि = जमा, कमी = नाम।
  • नियम A = L + C से आते हैं; आहरण और व्यय पूँजी घटाते हैं, इसलिए नाम होते हैं। कुल नाम हमेशा कुल जमा के बराबर।
  • दोबारा बेचने के लिए खरीदा माल: क्रय खाता नाम; बेचा गया माल: विक्रय खाता विक्रय मूल्य पर जमा।
  • सुनहरे नियम (जाँच के लिए): व्यक्तिगत — पाने वाला नाम, देने वाला जमा; वास्तविक — जो आए नाम, जो जाए जमा; नाममात्र — व्यय और हानियाँ नाम, आय और अभिलाभ जमा।

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