रोकड़ बही: नकद और बैंक के सारे पैसे की एक बही
- समझा पाओगे कि रोज़नामचे को विशेष बहियों में क्यों बाँटा जाता है और रोकड़ बही रोज़नामचा और खाता दोनों क्यों है
- एक खाने वाली रोकड़ बही बनाकर उसका शेष निकाल पाओगे
- विपरीत प्रविष्टियों, चेक और अधिविकर्ष सहित दो खाने वाली (रोकड़ + बैंक) रोकड़ बही बना पाओगे
- रोकड़ बही की खाता बही में खतौनी कर पाओगे और नकद बट्टे को सही ढंग से लिख पाओगे
अध्याय 4 में स्वागत है! अध्याय 3 में तुमने हर लेन-देन एक ही रोज़नामचे में लिखा। महीने में दस प्रविष्टियों वाली छोटी दुकान के लिए यह ठीक है। पर किसी व्यस्त मोबाइल स्टोर के बारे में सोचो: दिन में पचास बिक्री, हर घंटे UPI भुगतान, चेक, किराया, वेतन… दिन में पचास बार “रोकड़ खाता नाम, विक्रय खाते से” लिखना धीमा और उबाऊ है। इसलिए लेखाकार रोज़नामचे को विशेष बहियों में बाँट देते हैं। आज हम सबसे लोकप्रिय बही से शुरू करेंगे: रोकड़ बही (Cash Book)। इस पाठ के अंत तक तुम रोकड़ बही बना पाओगे, बैंक की प्रविष्टियाँ सँभाल पाओगे, रहस्यमय अक्षर “C” को समझ पाओगे और उसका शेष एक्सपर्ट की तरह निकाल पाओगे।
1. रोज़नामचे को विशेष बहियों में क्यों बाँटें?
विकास शर्मा अलीगढ़ में शर्मा स्टेशनरी मार्ट चलाते हैं। पहले साल उन्होंने सब कुछ एक ही रोज़नामचे में लिखा। अक्टूबर तक रोज़नामचे में 900 प्रविष्टियाँ हो गईं, और उनमें से 600 सिर्फ़ नकद आने या जाने की थीं। शाम को मदद करने वाले उनके भतीजे रोहन ने कहा: “चाचा, सिर्फ़ नकद के लिए एक अलग रजिस्टर, सिर्फ़ उधार खरीद के लिए एक और सिर्फ़ उधार बिक्री के लिए एक और क्यों न रखें? फिर आप रोकड़ रजिस्टर लिखिए और मैं उसी समय बिक्री रजिस्टर लिख लूँगा।” विशेष बहियों का विचार ठीक यही है।
व्यवसाय के बहुत-से लेन-देन बार-बार दोहराए जाते हैं: नकद आना, नकद देना, उधार माल खरीदना, उधार माल बेचना। एक जैसे लेन-देनों के हर समूह को उसकी अपनी बही में लिखा जाता है। इन बहियों को विशेष रोज़नामचे, दैनिक बहियाँ (Day books) या सहायक बहियाँ (Subsidiary books) कहते हैं। NCERT इन बहियों की चर्चा करती है:
| बही | इसमें क्या लिखा जाता है |
|---|---|
| रोकड़ बही | सभी नकद (और बैंक) प्राप्तियाँ और भुगतान |
| क्रय बही (Purchases Book) | माल की उधार खरीद |
| क्रय वापसी बही (Return Outwards Book) | पूर्तिकर्ताओं को लौटाया गया माल |
| विक्रय बही (Sales Book) | माल की उधार बिक्री |
| विक्रय वापसी बही (Return Inwards Book) | ग्राहकों द्वारा लौटाया गया माल |
| मुख्य रोज़नामचा (Journal Proper) | वह सब कुछ जो ऊपर की किसी बही में फ़िट नहीं होता |
विशेष बहियाँ समय बचाती हैं, श्रम-विभाजन संभव बनाती हैं (अलग-अलग लोग एक साथ अलग-अलग बहियाँ लिख सकते हैं) और लेखों की जाँच आसान करती हैं। इस अध्याय के बाकी तीन पाठों में लघु रोकड़ बही, बाकी विशेष बहियाँ और मुख्य रोज़नामचा आएँगे।
2. रोकड़ बही क्या है?
रोकड़ बही: वह बही जिसमें नकद प्राप्तियों और नकद भुगतानों के सभी लेन-देन तिथि-क्रम में लिखे जाते हैं। यह प्रारंभिक नकद (और बैंक) शेष से शुरू होती है और आमतौर पर महीने-दर-महीने बनाई जाती है।
रोकड़ बही ख़ास है क्योंकि यह एक साथ दो काम करती है:
- यह प्रारंभिक प्रविष्टि की बही (Book of original entry) है (रोज़नामचे की तरह): नकद लेन-देन सबसे पहले यहीं, तिथि-क्रम में, सीधे स्रोत प्रलेखों (कैश मेमो, रसीद, प्रमाणक) से लिखे जाते हैं।
- यह रोकड़ खाता भी है (खाता बही की तरह): इसमें नाम पक्ष (प्राप्तियाँ) और जमा पक्ष (भुगतान) होते हैं और इसका शेष ठीक खाता बही के खाते की तरह निकाला जाता है।
इसलिए जब रोकड़ बही रखी जाती है, तो नकद लेन-देनों को दोबारा रोज़नामचे में नहीं लिखा जाता, और खाता बही में अलग रोकड़ खाता (और बैंक खाना हो तो बैंक खाता भी) नहीं खोला जाता।
“रोकड़ बही = रोज़नामचा + रोकड़ खाता।” बायाँ पक्ष = पैसा आया (नाम), दायाँ पक्ष = पैसा गया (जमा)। बस याद रखो: कैश आया, बाएँ में; कैश गया, दाएँ में।
रोकड़ बही कभी उधार लेन-देन नहीं लिखती। “राव बुक डिपो को ₹5,000 का माल बेचा” (न नकद, न चेक) रोकड़ बही में नहीं जाएगा; यह विक्रय बही में जाएगा। रोकड़ बही में प्रविष्टि तभी होगी जब राव बुक डिपो सचमुच भुगतान करेगा।
3. एक खाने वाली रोकड़ बही
जब व्यवसाय के केवल नकद लेन-देन हों (बैंक खाता न हो, या बैंक का हिसाब अलग रखा जाता हो), तो वह हर पक्ष में एक राशि-खाने वाली रोकड़ बही रखता है (Single column cash book)।
| नाम (प्राप्तियाँ) | (भुगतान) जमा | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तिथि | प्राप्तियाँ | ब.पृ.सं. | ₹ | तिथि | भुगतान | ब.पृ.सं. | ₹ |
प्राप्तियाँ उस खाते के नाम के साथ “…खाते से” लिखकर दर्ज होती हैं जिससे नकद आया (विक्रय खाते से, मोहन के खाते से)। भुगतान उस खाते के नाम के साथ “…खाते द्वारा” लिखकर दर्ज होते हैं जिसके लिए नकद दिया गया (किराया खाते द्वारा, क्रय खाते द्वारा)।
अप्रैल 1 हाथ में नकद ₹25,000 · अप्रैल 3 मोहन (एक ग्राहक) से प्राप्त ₹8,500 · अप्रैल 5 दुकान का किराया दिया ₹6,000 · अप्रैल 8 नकद माल खरीदा ₹12,400 · अप्रैल 10 नकद बिक्री ₹15,600 · अप्रैल 14 कार्यालय के उपयोग के लिए प्रिंटर खरीदा ₹9,800 · अप्रैल 18 गुप्ता पेपर हाउस (एक पूर्तिकर्ता) को दिया ₹7,200 · अप्रैल 22 नकद बिक्री ₹11,300 · अप्रैल 25 बिजली का बिल दिया ₹1,850 · अप्रैल 28 निजी उपयोग के लिए निकाले ₹3,000 · अप्रैल 30 वेतन दिया ₹8,000 · अप्रैल 30 बैंक में जमा किए ₹5,000।
- मदों को छाँटो: पैसा आया = प्रारंभिक शेष, मोहन, दो नकद बिक्री। बाकी सब पैसा गया।
- प्रिंटर एक परिसंपत्ति है (प्रिंटर खाता या कार्यालय उपकरण खाता), “क्रय” नहीं। निजी निकासी आहरण खाते में जाती है। बैंक में जमा करना नकद का भुगतान है, इसलिए यह दाएँ पक्ष में “बैंक खाते द्वारा” लिखा जाएगा।
- प्राप्तियों का योग = 25,000 + 8,500 + 15,600 + 11,300 = ₹60,400। भुगतानों का योग = ₹53,250।
- शेष = 60,400 − 53,250 = ₹7,150। इसे भुगतान पक्ष (छोटे पक्ष) में “शेष आगे ले गए (c/d)” लिखो, दोनों पक्षों का योग करो, फिर 1 मई को “शेष आगे लाए (b/d)” के रूप में नीचे लाओ।
| नाम | जमा | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तिथि | प्राप्तियाँ | ब.पृ.सं. | ₹ | तिथि | भुगतान | ब.पृ.सं. | ₹ |
| 2026 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 25,000 | 2026 अप्रैल 5 | किराया खाते द्वारा | 6,000 | ||
| अप्रैल 3 | मोहन के खाते से | 8,500 | अप्रैल 8 | क्रय खाते द्वारा | 12,400 | ||
| अप्रैल 10 | विक्रय खाते से | 15,600 | अप्रैल 14 | प्रिंटर खाते द्वारा | 9,800 | ||
| अप्रैल 22 | विक्रय खाते से | 11,300 | अप्रैल 18 | गुप्ता पेपर हाउस के खाते द्वारा | 7,200 | ||
| अप्रैल 25 | बिजली खाते द्वारा | 1,850 | |||||
| अप्रैल 28 | आहरण खाते द्वारा | 3,000 | |||||
| अप्रैल 30 | वेतन खाते द्वारा | 8,000 | |||||
| अप्रैल 30 | बैंक खाते द्वारा | 5,000 | |||||
| अप्रैल 30 | शेष आगे ले गए (c/d) | 7,150 | |||||
| 60,400 | 60,400 | ||||||
| मई 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 7,150 | |||||
रोकड़ खाना हमेशा नाम शेष दिखाता है (या शून्य)। जितना नकद तुम्हारे पास है उससे ज़्यादा तुम दे ही नहीं सकते: भुगतान कभी भी प्रारंभिक नकद + प्राप्तियों से अधिक नहीं हो सकते।
1 अप्रैल 2026 को हाथ में नकद ₹9,000। नकद बिक्री ₹14,500। नेहा से प्राप्त ₹3,200। मज़दूरी दी ₹4,800। नकद माल खरीदा ₹8,600। किराया दिया ₹2,450। 30 अप्रैल को नकद शेष कितना है (₹ में)?
4. रोकड़ बही की खाता बही में खतौनी
क्योंकि रोकड़ बही ख़ुद ही रोकड़ खाता है, इसलिए हमें हर प्रविष्टि के केवल दूसरे पक्ष की खतौनी (Posting) करनी होती है। नियम एक सीधा आईना है:
रोकड़ बही के नाम (प्राप्ति) पक्ष में लिखा खाता खाता बही में जमा किया जाता है: “रोकड़ खाते द्वारा”।
रोकड़ बही के जमा (भुगतान) पक्ष में लिखा खाता खाता बही में नाम किया जाता है: “रोकड़ खाते से”।
क्यों? नकद मोहन से आया, यानी मोहन ने लाभ दिया, इसलिए वह जमा होगा। नकद किराए के लिए गया, यानी किराया खाते को लाभ मिला, इसलिए वह नाम होगा। ऊपर की रोकड़ बही से दो उदाहरण:
| तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ | तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 3 | रोकड़ खाते द्वारा | CB | 8,500 |
| तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ | तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 5 | रोकड़ खाते से | CB | 6,000 |
पृष्ठ संख्या वाले खाने में “CB” (रोकड़ बही का पृष्ठ) लिखा जाता है ताकि कोई भी प्रविष्टि को वापस खोज सके।
5. बैंक खाने से पहले थोड़ी बैंकिंग
अधिकतर व्यवसाय बैंक में चालू खाता (Current account) रखते हैं। चालू खाते पर बैंक आमतौर पर ब्याज नहीं देता और सेवाओं के लिए छोटा शुल्क (बैंक प्रभार) ले सकता है। कुछ शब्द जो तुम्हें जानने ही चाहिए:
- जमा पर्ची (Pay-in-slip): नकद या चेक जमा करते समय भरा जाने वाला फ़ॉर्म। बैंक के कैशियर के हस्ताक्षर वाला इसका प्रतिपर्ण (counterfoil) रसीद के रूप में तुम्हें वापस मिलता है।
- चेक (Cheque): अपने बैंक को एक निश्चित राशि देने का लिखित आदेश। वाहक (Bearer) चेक का भुगतान उसे होता है जिसके पास वह हो। “bearer” शब्द काट देने पर वह आदेश (Order) चेक बन जाता है, जिसका भुगतान केवल नामित व्यक्ति (या जिसे वह आदेश दे) को पहचान के बाद होता है।
- रेखांकित चेक (Crossed cheque): चेक पर दो समानांतर रेखाएँ। इसे काउंटर पर नकद नहीं लिया जा सकता; पैसा केवल बैंक खाते के ज़रिए जाता है। रेखाओं के बीच “A/c Payee only” लिखा हो तो यह केवल प्राप्तकर्ता के अपने खाते में जमा हो सकता है। रेखाओं के बीच किसी बैंक का नाम हो (विशेष रेखांकन) तो भुगतान केवल उसी बैंक के ज़रिए होता है।
- पृष्ठांकन (Endorsement): आदेश चेक को किसी और को हस्तांतरित करने के लिए उसकी पीठ पर हस्ताक्षर करना। वाहक चेक सिर्फ़ सौंप देने से हस्तांतरित हो जाता है।
- अधिविकर्ष (Overdraft): जब बैंक तुम्हें जमा से अधिक निकालने देता है। तब तुम्हारा बैंक शेष एक देयता बन जाता है।
आज UPI ट्रांसफ़र, NEFT/RTGS, डेबिट कार्ड भुगतान और ATM निकासी, सभी बैंक खाते में पैसा लाते या ले जाते हैं, इसलिए लेखांकन में इन्हें ठीक चेक की तरह माना जाता है: ये बैंक खाने में जाते हैं।
6. दो खाने वाली रोकड़ बही (रोकड़ + बैंक)
जब बैंक लेन-देन बहुत हों, तो दोनों पक्षों में रोकड़ खाने के साथ एक अलग बैंक राशि-खाना जोड़ दिया जाता है (Double column cash book)। अब यही बही किसी भी समय हाथ में नकद और बैंक में नकद दोनों दिखाती है, और खाता बही में बैंक खाता नहीं खोला जाता।
| नाम | जमा | ||||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तिथि | प्राप्तियाँ | ब.पृ.सं. | रोकड़ ₹ | बैंक ₹ | तिथि | भुगतान | ब.पृ.सं. | रोकड़ ₹ | बैंक ₹ |
6.1 विपरीत प्रविष्टियाँ: अक्षर “C”
कुछ लेन-देन केवल रोकड़ और बैंक के बीच होते हैं:
- बैंक में नकद जमा किया: बैंक बढ़ा (बैंक खाना, प्राप्ति पक्ष, “रोकड़ खाते से”) और नकद घटा (रोकड़ खाना, भुगतान पक्ष, “बैंक खाते द्वारा”)।
- कार्यालय के उपयोग के लिए बैंक से नकद निकाला: नकद बढ़ा (रोकड़ खाना, प्राप्ति पक्ष, “बैंक खाते से”) और बैंक घटा (बैंक खाना, भुगतान पक्ष, “रोकड़ खाते द्वारा”)।
ऐसे लेन-देन के दोनों पक्ष रोकड़ बही के अंदर ही हैं। ऐसी प्रविष्टियों को विपरीत प्रविष्टियाँ (Contra entries) कहते हैं, और दोनों पंक्तियों के पृष्ठ संख्या खाने में अक्षर C लिखा जाता है। “C” लेखाकार को बताता है: इसकी खाता बही में खतौनी मत करो, दोनों प्रभाव यहीं मौजूद हैं।
विपरीत प्रविष्टि: ऐसा लेन-देन जो रोकड़ बही के नाम और जमा दोनों पक्षों में लिखा जाता है (रोकड़ ↔ बैंक)। इसके पृष्ठ संख्या खाने में “C” लिखा जाता है और इसकी खाता बही में खतौनी नहीं होती।
निजी उपयोग के लिए बैंक से निकाला गया नकद विपरीत प्रविष्टि नहीं है। केवल बैंक खाना घटता है (आहरण खाते द्वारा); व्यवसाय का नकद नहीं बढ़ता। मालिक द्वारा घर के लिए ATM से निकासी पर भी यही लागू होता है।
6.2 प्राप्त चेक
- उसी दिन जमा: सीधे बैंक खाने (प्राप्ति पक्ष) में लिखो।
- बाद के किसी दिन जमा: प्राप्ति के दिन चेक को नकद मानो: रोकड़ खाना, प्राप्ति पक्ष। जमा करने के दिन विपरीत प्रविष्टि करो: बैंक खाना प्राप्ति (रोकड़ खाते से) और रोकड़ खाना भुगतान (बैंक खाते द्वारा)।
- चेक अनादरित (Dishonoured) (बिना भुगतान लौटा, आमतौर पर ग्राहक के खाते में पर्याप्त पैसा न होने से): राशि को बैंक खाने के भुगतान पक्ष में ग्राहक के नाम के सामने लिखो। इससे पहले की प्राप्ति रद्द हो जाती है और वह फिर से देनदार बन जाता है।
6.3 बैंक की अपनी प्रविष्टियाँ
अगर बैंक ब्याज, कमीशन या सेवा प्रभार काटता है, तो उन्हें बैंक खाने के भुगतान पक्ष में लिखो (बैंक प्रभार खाते द्वारा / ब्याज खाते द्वारा)। अगर बैंक तुम्हारा खाता जमा करता है (बैंक द्वारा वसूला गया ब्याज या लाभांश, UPI या NEFT से सीधे मिला पैसा), तो उसे बैंक खाने के प्राप्ति पक्ष में लिखो।
6.4 बैंक खाने का शेष
रोकड़ खाने का शेष हमेशा नाम होता है। बैंक खाने का शेष आमतौर पर नाम होता है (बैंक में पैसा = परिसंपत्ति), पर अधिविकर्ष होने पर यह जमा शेष भी हो सकता है। प्रारंभिक अधिविकर्ष को भुगतान पक्ष में “शेष आगे लाए (b/d)” लिखा जाता है।
अप्रैल 1 हाथ में नकद ₹18,000; बैंक शेष ₹60,000 · अप्रैल 2 चेक से मोबाइल फ़ोन (माल) खरीदे ₹35,000 · अप्रैल 4 नकद बिक्री ₹22,500 · अप्रैल 6 बैंक में नकद जमा किया ₹15,000 · अप्रैल 9 ख़ान इलेक्ट्रॉनिक्स से ₹12,000 का चेक मिला और उसी दिन जमा किया · अप्रैल 11 अनिल से चेक मिला ₹7,500 · अप्रैल 13 अनिल का चेक बैंक में जमा किया · अप्रैल 15 UPI से किराया दिया ₹8,000 · अप्रैल 18 कार्यालय के लिए बैंक से नकद निकाला ₹10,000 · अप्रैल 20 UPI से बिक्री की राशि मिली ₹9,400 · अप्रैल 22 नकद मज़दूरी दी ₹4,500 · अप्रैल 25 अनिल का चेक अनादरित हुआ · अप्रैल 27 बैंक प्रभार ₹150 · अप्रैल 28 मालिक ने निजी उपयोग के लिए ATM से ₹5,000 निकाले · अप्रैल 30 चेक से वेतन दिया ₹12,000।
- प्रारंभिक शेष: रोकड़ 18,000 और बैंक 60,000 प्राप्ति पक्ष में “शेष आगे लाए (b/d)”।
- विपरीत प्रविष्टियाँ (C लगाओ): अप्रैल 6 जमा (बैंक नाम पक्ष / रोकड़ जमा पक्ष, 15,000); अप्रैल 13 अनिल का चेक जमा (7,500); अप्रैल 18 कार्यालय के लिए निकासी (रोकड़ नाम पक्ष / बैंक जमा पक्ष, 10,000)।
- अप्रैल 11: अनिल का चेक उस दिन जमा नहीं हुआ, इसलिए यह प्राप्ति के रूप में रोकड़ खाने में जाएगा। अप्रैल 25: इसका अनादर बैंक खाने के भुगतान पक्ष में “अनिल के खाते द्वारा”।
- UPI से किराया, ATM आहरण, बैंक प्रभार और चेक से वेतन, सब बैंक खाने के भुगतान हैं। UPI बिक्री बैंक खाने की प्राप्ति है।
- रोकड़: प्राप्तियाँ 18,000 + 22,500 + 7,500 + 10,000 = 58,000; भुगतान 15,000 + 7,500 + 4,500 = 27,000; शेष ₹31,000।
- बैंक: प्राप्तियाँ 60,000 + 12,000 + 15,000 + 7,500 + 9,400 = 1,03,900; भुगतान 35,000 + 8,000 + 10,000 + 7,500 + 150 + 5,000 + 12,000 = 77,650; शेष ₹26,250।
| नाम | जमा | ||||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तिथि | प्राप्तियाँ | ब.पृ.सं. | रोकड़ ₹ | बैंक ₹ | तिथि | भुगतान | ब.पृ.सं. | रोकड़ ₹ | बैंक ₹ |
| 2026 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 18,000 | 60,000 | 2026 अप्रैल 2 | क्रय खाते द्वारा | 35,000 | |||
| अप्रैल 4 | विक्रय खाते से | 22,500 | अप्रैल 6 | बैंक खाते द्वारा | C | 15,000 | |||
| अप्रैल 6 | रोकड़ खाते से | C | 15,000 | अप्रैल 13 | बैंक खाते द्वारा | C | 7,500 | ||
| अप्रैल 9 | ख़ान इलेक्ट्रॉनिक्स के खाते से | 12,000 | अप्रैल 15 | किराया खाते द्वारा | 8,000 | ||||
| अप्रैल 11 | अनिल के खाते से | 7,500 | अप्रैल 18 | रोकड़ खाते द्वारा | C | 10,000 | |||
| अप्रैल 13 | रोकड़ खाते से | C | 7,500 | अप्रैल 22 | मज़दूरी खाते द्वारा | 4,500 | |||
| अप्रैल 18 | बैंक खाते से | C | 10,000 | अप्रैल 25 | अनिल के खाते द्वारा (चेक अनादरित) | 7,500 | |||
| अप्रैल 20 | विक्रय खाते से | 9,400 | अप्रैल 27 | बैंक प्रभार खाते द्वारा | 150 | ||||
| अप्रैल 28 | आहरण खाते द्वारा | 5,000 | |||||||
| अप्रैल 30 | वेतन खाते द्वारा | 12,000 | |||||||
| अप्रैल 30 | शेष आगे ले गए (c/d) | 31,000 | 26,250 | ||||||
| 58,000 | 1,03,900 | 58,000 | 1,03,900 | ||||||
| मई 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 31,000 | 26,250 | ||||||
एक व्यवसाय अप्रैल की शुरुआत ₹4,000 के बैंक अधिविकर्ष से करता है। महीने में वह ₹7,000 नकद जमा करता है, एक पूर्तिकर्ता को ₹5,500 का चेक देता है और बैंक अधिविकर्ष पर ₹200 ब्याज लगाता है। अप्रैल के अंत में अधिविकर्ष (बैंक खाने का जमा शेष) कितना है (₹ में)?
अगर व्यवसाय रोकड़ बही न रखता, तो “बैंक में ₹15,000 नकद जमा किए” के लिए रोज़नामचे में कौन-सी प्रविष्टि करता?
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 6 | बैंक खाता नाम | 15,000 | ||
| रोकड़ खाते से | 15,000 | |||
| (बैंक में नकद जमा किया) |
7. नकद बट्टा और रोकड़ बही
नकद बट्टा (Cash discount) जल्दी भुगतान करने पर दी गई छूट है। रोकड़ बही केवल उतना पैसा लिखती है जितना सचमुच आता-जाता है। बट्टे वाला हिस्सा मुख्य रोज़नामचे के ज़रिए लिखा जाता है (NCERT का तरीका), ताकि ग्राहक या पूर्तिकर्ता का खाता पूरा निपट जाए।
- सचमुच मिला नकद = ₹9,800 → रोकड़ बही, प्राप्ति पक्ष: “मोहन के खाते से 9,800”।
- दिया गया बट्टा = 10,000 − 9,800 = ₹200। यह हमारे लिए हानि (व्यय) है → मुख्य रोज़नामचा।
- मोहन के खाते के जमा पक्ष में “रोकड़ खाते द्वारा 9,800” और “दिया गया बट्टा खाते द्वारा 200” दिखेंगे। उसके ₹10,000 पूरे निपट गए।
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 10 | दिया गया बट्टा खाता नाम | 200 | ||
| मोहन के खाते से | 200 | |||
| (निपटान पर मोहन को नकद बट्टा दिया) |
शर्मा स्टेशनरी मार्ट पर गुप्ता पेपर हाउस के ₹15,000 बकाया थे और उसने पूर्ण निपटान में ₹14,700 नकद दिए। रोकड़ बही में ₹14,700 लिखे गए। बट्टे के लिए मुख्य रोज़नामचे में कौन-सी प्रविष्टि होगी?
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| गुप्ता पेपर हाउस का खाता नाम | 300 | |||
| प्राप्त बट्टा खाते से | 300 | |||
| (निपटान पर नकद बट्टा प्राप्त हुआ) |
कुछ संदर्भ पुस्तकें रोकड़ बही के हर पक्ष में तीसरा “बट्टा” खाना जोड़ती हैं (“तीन खाने वाली रोकड़ बही”) और उसके मासिक योग की खतौनी करती हैं। NCERT दो खाने (रोकड़ और बैंक) वाली रोकड़ बही का प्रयोग करती है, और बट्टा मुख्य रोज़नामचे से लिखा जाता है। व्यापारिक बट्टा (Trade discount) कहीं भी नहीं लिखा जाता; केवल शुद्ध राशि ली जाती है।
8. दो खाने वाली रोकड़ बही की खतौनी
- प्राप्ति पक्ष की हर मद (C प्रविष्टियों और शेषों को छोड़कर) अपने खाते में जमा की जाती है: “रोकड़ खाते द्वारा” या “बैंक खाते द्वारा”, इस पर निर्भर करते हुए कि कौन-सा खाना प्रयोग हुआ।
- भुगतान पक्ष की हर मद (C प्रविष्टियों और शेषों को छोड़कर) नाम की जाती है: “रोकड़ खाते से” या “बैंक खाते से”।
- खतौनी करते समय विपरीत (C) प्रविष्टियाँ छोड़ दी जाती हैं।
उदाहरण के लिए, वर्मा मोबाइल स्टोर की बही से: विक्रय खाता “रोकड़ खाते द्वारा 22,500” (अप्रैल 4) और “बैंक खाते द्वारा 9,400” (अप्रैल 20) से जमा होगा; अनिल का खाता “रोकड़ खाते द्वारा 7,500” (अप्रैल 11) से जमा और “बैंक खाते से 7,500” (अप्रैल 25) से नाम होगा, यानी वह फिर से ₹7,500 का देनदार है।
ऊपर वर्मा मोबाइल स्टोर की रोकड़ बही में कितने लेन-देन विपरीत प्रविष्टियाँ थे?
- रोकड़ खाना (जमा) और बैंक खाना (नाम)
- रोकड़ खाना (नाम) और बैंक खाना (जमा), C के साथ
- केवल बैंक खाना (जमा), आहरण के सामने
- केवल मुख्य रोज़नामचे में
- बैंक में जमा किया नकद
- हाथ में नकद
- एक अशुद्धि, क्योंकि ऐसा कभी हो ही नहीं सकता
- बैंक अधिविकर्ष
9. परीक्षा के सुझाव
- सबसे ऊपर हमेशा व्यवसाय का नाम, “रोकड़ बही”, “नाम” और “जमा” लिखो। प्राप्तियों में “…खाते से” और भुगतानों में “…खाते द्वारा” लिखो।
- विपरीत प्रविष्टि की दोनों पंक्तियों के पृष्ठ संख्या खाने में “C” लिखो। “C” छूटने पर अंक कटते हैं।
- शेष आगे ले गए (c/d) और अगले महीने का शेष आगे लाए (b/d), दोनों दिखाओ; परीक्षक दोनों जाँचते हैं।
- हर पंक्ति में चेक, UPI, NEFT, बैंक के ज़रिए जैसे शब्द ढूँढो: यही तय करते हैं कि कौन-सा खाना।
📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)
- विशेष बहियाँ (दैनिक बहियाँ) रोज़नामचे को बाँटती हैं: रोकड़ बही, क्रय, क्रय वापसी, विक्रय, विक्रय वापसी बहियाँ और मुख्य रोज़नामचा।
- रोकड़ बही = प्रारंभिक प्रविष्टि की बही + रोकड़ खाता; प्राप्तियाँ बाएँ (…खाते से), भुगतान दाएँ (…खाते द्वारा); खाता बही में अलग रोकड़ खाता नहीं।
- रोकड़ खाना हमेशा नाम शेष दिखाता है; बैंक खाना जमा शेष (अधिविकर्ष) भी दिखा सकता है।
- विपरीत प्रविष्टि = व्यवसाय के उपयोग के लिए रोकड़ ↔ बैंक, दोनों पक्षों में लिखी, C लगाया, खतौनी नहीं होती।
- बाद में जमा होने वाला चेक: प्राप्ति पर रोकड़ खाना, जमा पर विपरीत प्रविष्टि; अनादर: बैंक खाने का भुगतान पक्ष, ग्राहक के नाम के सामने।
- खतौनी: प्राप्ति पक्ष के खाते जमा, भुगतान पक्ष के खाते नाम; नकद बट्टा मुख्य रोज़नामचे से लिखा जाता है।
दबाने से आपकी प्रगति इसी फ़ोन/कंप्यूटर पर सेव होगी।