बहियों में मूल्यह्रास का लेखा
- जब मूल्यह्रास परिसंपत्ति खाते में लगाया जाए तब रोज़नामचा प्रविष्टियाँ कर पाओगे
- मूल्यह्रास प्रावधान खाता रखने पर रोज़नामचा प्रविष्टियाँ कर पाओगे
- कई वर्षों के लिए परिसंपत्ति खाता, मूल्यह्रास खाता और प्रावधान खाता बना पाओगे
- दोनों पद्धतियों में तुलन-पत्र में परिसंपत्ति सही ढंग से दिखा पाओगे
अब तुम मूल्यह्रास की गणना कर सकते हो। पर कच्चे काम की संख्या तब तक लेखांकन नहीं बनती जब तक उसे लिखा न जाए। इसे लिखने के दो तरीके हैं। पहले में हर वर्ष परिसंपत्ति खाते को ही घटाते हैं। दूसरे में परिसंपत्ति खाते को उसकी लागत पर जैसा का तैसा छोड़ देते हैं और मूल्यह्रास को एक अलग खाते में इकट्ठा करते हैं जिसे मूल्यह्रास प्रावधान खाता (Provision for Depreciation A/c) कहते हैं। दोनों में लाभ समान आता है; अंतर इसमें है कि खाता बही और तुलन-पत्र क्या दिखाते हैं। बोर्ड पेपर में इस पाठ से 6 अंक के खाता बही प्रश्न खूब आते हैं, इसलिए हर खाता मेरे साथ लिखते चलो।
1. साझा पहला कदम: खरीद का लेखा
पद्धति कोई भी हो, परिसंपत्ति पहले अपनी पूरी लागत (मूल्य + स्थापना + भाड़ा आदि) पर लिखी जाती है, केवल खरीद के वर्ष में।
परिसंपत्ति खाता नाम बैंक खाते से / रोकड़ खाते से / आपूर्तिकर्ता के खाते से
क्रय मूल्य के साथ, और अलग से या साथ में, स्थापना व अन्य खर्चों के साथ।
1 अप्रैल 2026 को आहूजा इंजीनियरिंग से ₹1,50,000 की मशीन उधार खरीदी।
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 1 | मशीनरी खाता नाम | 1,50,000 | ||
| आहूजा इंजीनियरिंग के खाते से | 1,50,000 | |||
| (मशीन उधार खरीदी) |
2. पद्धति 1: मूल्यह्रास को परिसंपत्ति खाते में लगाना
यहाँ मूल्यह्रास परिसंपत्ति खाते में ही जमा किया जाता है, इसलिए परिसंपत्ति खाते का शेष हर वर्ष घटता है। हर वर्ष के अंत में दो प्रविष्टियाँ होती हैं:
(a) मूल्यह्रास खाता नाम परिसंपत्ति खाते से (परिसंपत्ति पर मूल्यह्रास लगाने के लिए)
(b) लाभ-हानि खाता नाम मूल्यह्रास खाते से (मूल्यह्रास को लाभ-हानि खाते में हस्तांतरित करने के लिए)
तुलन-पत्र: परिसंपत्ति अपने शुद्ध पुस्तक मूल्य (लागत घटाओ अब तक का मूल्यह्रास) पर दिखती है।
खुर्जा की आहूजा प्रिंटर्स 1 अप्रैल 2026 को ₹1,80,000 की मशीन चेक से खरीदती है और उसकी स्थापना के ₹20,000 नकद देती है। उपयोगी जीवनकाल 5 वर्ष, शुद्ध अवशिष्ट मूल्य ₹20,000। SLM से मूल्यह्रास = (2,00,000 − 20,000) ÷ 5 = ₹36,000 प्रति वर्ष। बहियाँ 31 मार्च को बंद होती हैं। आओ सब कुछ लिखें।
- खरीद: मशीनरी खाता नाम ₹1,80,000 बैंक खाते से; स्थापना: मशीनरी खाता नाम ₹20,000 रोकड़ खाते से। स्थापना खर्च पूँजीकृत होता है, यानी मशीन की लागत में जुड़ता है।
- 31 मार्च 2027: मूल्यह्रास खाता नाम, मशीनरी खाते से ₹36,000।
- 31 मार्च 2027: लाभ-हानि खाता नाम, मूल्यह्रास खाते से ₹36,000।
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 1 | मशीनरी खाता नाम | 1,80,000 | ||
| बैंक खाते से | 1,80,000 | |||
| (मशीन चेक द्वारा खरीदी) | ||||
| अप्रैल 1 | मशीनरी खाता नाम | 20,000 | ||
| रोकड़ खाते से | 20,000 | |||
| (स्थापना खर्च चुकाया) | ||||
| 2027 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाता नाम | 36,000 | ||
| मशीनरी खाते से | 36,000 | |||
| (मशीनरी पर मूल्यह्रास लगाया) | ||||
| मार्च 31 | लाभ-हानि खाता नाम | 36,000 | ||
| मूल्यह्रास खाते से | 36,000 | |||
| (मूल्यह्रास लाभ-हानि खाते में हस्तांतरित किया) | ||||
| योग | 2,72,000 | 2,72,000 |
- वर्ष 1: नाम पक्ष में बैंक 1,80,000 और रोकड़ 20,000; जमा पक्ष में मूल्यह्रास 36,000 और शेष 1,64,000 आगे ले गए।
- वर्ष 2 और 3: आगे लाए शेष से शुरू करो, ₹36,000 मूल्यह्रास जमा करो, बाकी आगे ले जाओ: 1,28,000, फिर 92,000।
- मूल्यह्रास खाता ₹36,000 से नाम (मशीनरी से) होता है और हर वर्ष लाभ-हानि में हस्तांतरण से बंद हो जाता है। इसका कभी शेष नहीं रहता।
| तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ | तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 1 | बैंक खाते से | 1,80,000 | 2027 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 36,000 | ||
| अप्रैल 1 | रोकड़ खाते से (स्थापना) | 20,000 | मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 1,64,000 | ||
| 2,00,000 | 2,00,000 | ||||||
| 2027 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 1,64,000 | 2028 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 36,000 | ||
| मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 1,28,000 | |||||
| 1,64,000 | 1,64,000 | ||||||
| 2028 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 1,28,000 | 2029 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 36,000 | ||
| मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 92,000 | |||||
| 1,28,000 | 1,28,000 | ||||||
| 2029 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 92,000 |
| तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ | तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2027 मार्च 31 | मशीनरी खाते से | 36,000 | 2027 मार्च 31 | लाभ-हानि खाते द्वारा | 36,000 | ||
| 2028 मार्च 31 | मशीनरी खाते से | 36,000 | 2028 मार्च 31 | लाभ-हानि खाते द्वारा | 36,000 | ||
| 2029 मार्च 31 | मशीनरी खाते से | 36,000 | 2029 मार्च 31 | लाभ-हानि खाते द्वारा | 36,000 |
शर्मा ट्रेडर्स 31 मार्च 2027 को फर्नीचर पर ₹4,000 का मूल्यह्रास सीधे परिसंपत्ति खाते में लगाती है। वर्ष के अंत की पहली प्रविष्टि करो।
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2027 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाता नाम | 4,000 | ||
| फर्नीचर खाते से | 4,000 | |||
| (फर्नीचर पर मूल्यह्रास लगाया) |
2.1 यही पद्धति WDV और वर्ष के बीच की खरीद के साथ
- 2026-27 (6 महीने): 80,000 × 10% × 6/12 = ₹4,000 → शेष 76,000।
- 2027-28: 76,000 का 10% = ₹7,600 → शेष 68,400।
- 2028-29: 68,400 का 10% = ₹6,840 → शेष 61,560।
| तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ | तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2026 अक्टूबर 1 | बैंक खाते से | 80,000 | 2027 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 4,000 | ||
| मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 76,000 | |||||
| 80,000 | 80,000 | ||||||
| 2027 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 76,000 | 2028 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 7,600 | ||
| मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 68,400 | |||||
| 76,000 | 76,000 | ||||||
| 2028 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 68,400 | 2029 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 6,840 | ||
| मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 61,560 | |||||
| 68,400 | 68,400 | ||||||
| 2029 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 61,560 |
1 अप्रैल 2026 को ₹1,50,000 की एक मशीन खरीदी गई। WDV पर 10% वार्षिक मूल्यह्रास परिसंपत्ति खाते में लगाया जाता है। 1 अप्रैल 2028 को मशीनरी खाते का आगे लाया शेष (₹ में) कितना होगा?
3. पद्धति 2: मूल्यह्रास प्रावधान खाता बनाना
यहाँ परिसंपत्ति खाते को छुआ नहीं जाता। वह वर्ष-दर-वर्ष मूल लागत पर बना रहता है। हर वर्ष का मूल्यह्रास एक अलग खाते में इकट्ठा (संचित) किया जाता है जिसे मूल्यह्रास प्रावधान खाता या संचित मूल्यह्रास खाता (Accumulated Depreciation A/c) कहते हैं। इस खाते का जमा शेष हर वर्ष बढ़ता है।
(a) मूल्यह्रास खाता नाम मूल्यह्रास प्रावधान खाते से
(b) लाभ-हानि खाता नाम मूल्यह्रास खाते से
तुलन-पत्र: परिसंपत्ति मूल लागत पर दिखाई जाती है; प्रावधान परिसंपत्ति पक्ष में परिसंपत्ति में से घटाकर दिखाया जाता है (या, जैसा NCERT भी मानती है, देयता पक्ष में)।
आहूजा प्रिंटर्स अब मूल्यह्रास प्रावधान खाता रखती है। 31 मार्च 2027 को वह मशीनरी पर ₹36,000 का मूल्यह्रास लिखती है। वर्ष के अंत की पहली प्रविष्टि करो।
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2027 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाता नाम | 36,000 | ||
| मूल्यह्रास प्रावधान खाते से | 36,000 | |||
| (मशीनरी पर मूल्यह्रास का प्रावधान किया) |
आहूजा प्रिंटर्स के ₹36,000 के मूल्यह्रास के लिए वर्ष के अंत की दूसरी प्रविष्टि करो (दोनों पद्धतियों में समान)।
| तिथि | विवरण | ब.पृ.सं. | नाम राशि (₹) | जमा राशि (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2027 मार्च 31 | लाभ-हानि खाता नाम | 36,000 | ||
| मूल्यह्रास खाते से | 36,000 | |||
| (मूल्यह्रास लाभ-हानि खाते में हस्तांतरित किया) |
- मशीनरी खाता: खरीद पर ₹2,00,000 से नाम; हर वर्ष केवल ₹2,00,000 पर आगे ले जाया जाता है।
- मूल्यह्रास प्रावधान खाता: हर वर्ष ₹36,000 से जमा; शेष बढ़ता है 36,000 → 72,000 → 1,08,000।
- 31 मार्च 2029 का तुलन-पत्र: मशीनरी 2,00,000 घटाओ प्रावधान 1,08,000 = 92,000। शुद्ध आँकड़ा पद्धति 1 जैसा ही ₹92,000 है।
| तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ | तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2026 अप्रैल 1 | बैंक खाते से | 1,80,000 | 2027 मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 2,00,000 | ||
| अप्रैल 1 | रोकड़ खाते से (स्थापना) | 20,000 | |||||
| 2,00,000 | 2,00,000 | ||||||
| 2027 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 2,00,000 | 2028 मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 2,00,000 | ||
| 2028 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 2,00,000 | 2029 मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 2,00,000 | ||
| 2029 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 2,00,000 |
| तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ | तिथि | विवरण | रो.पृ.सं. | ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2027 मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 36,000 | 2027 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 36,000 | ||
| 36,000 | 36,000 | ||||||
| 2028 मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 72,000 | 2027 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 36,000 | ||
| 2028 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 36,000 | |||||
| 72,000 | 72,000 | ||||||
| 2029 मार्च 31 | शेष आगे ले गए (c/d) | 1,08,000 | 2028 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 72,000 | ||
| 2029 मार्च 31 | मूल्यह्रास खाते द्वारा | 36,000 | |||||
| 1,08,000 | 1,08,000 | ||||||
| 2029 अप्रैल 1 | शेष आगे लाए (b/d) | 1,08,000 |
| 31 मार्च 2029 का तुलन-पत्र (अंश) — परिसंपत्ति पक्ष | ₹ | |
|---|---|---|
| मशीनरी (लागत पर) | 2,00,000 | |
| घटाओ: मूल्यह्रास प्रावधान | (1,08,000) | 92,000 |
1 अप्रैल 2026 को ₹3,00,000 का उपकरण खरीदा गया। मूल लागत पर 10% वार्षिक मूल्यह्रास मूल्यह्रास प्रावधान खाते में इकट्ठा किया जाता है। 31 मार्च 2029 को प्रावधान खाते का शेष (₹ में) कितना होगा?
यदि कोई फर्म प्रावधान खाते के साथ WDV अपनाती है, तो हर वर्ष का WDV = लागत − वर्ष के आरंभ में प्रावधान का शेष, और दर उसी आँकड़े पर लगाई जाती है।
4. दोनों पद्धतियाँ साथ-साथ
| आधार | परिसंपत्ति खाते में लगाना | मूल्यह्रास प्रावधान खाता |
|---|---|---|
| मूल्यह्रास प्रविष्टि में जमा | परिसंपत्ति खाता | मूल्यह्रास प्रावधान खाता |
| परिसंपत्ति खाते का शेष | हर वर्ष घटता है (शुद्ध पुस्तक मूल्य) | मूल लागत पर रहता है |
| अब तक का कुल मूल्यह्रास | सीधे दिखाई नहीं देता | प्रावधान खाते में दिखता है |
| तुलन-पत्र | परिसंपत्ति पुस्तक मूल्य पर | परिसंपत्ति लागत पर, घटाओ प्रावधान |
| लाभ पर प्रभाव | समान: दोनों में लाभ-हानि खाता वर्ष के मूल्यह्रास से नाम होता है | |
तीन आम गलतियाँ: (i) मूल्यह्रास प्रावधान को जमा करना और साथ में परिसंपत्ति खाता भी घटाना (दोहरी गिनती); (ii) वर्ष के अंत में मूल्यह्रास खाते में शेष दिखाना (यह हमेशा लाभ-हानि में बंद होता है); (iii) प्रावधान खाते के जमा पक्ष में “शेष आगे ले गए” लिखना। प्रावधान का शेष जमा होता है, इसलिए उसका c/d नाम पक्ष में जाता है।
- मूल लागत पर, उसमें से प्रावधान घटाकर
- केवल क्रमागत ह्रास मूल्य पर, लागत का कोई उल्लेख नहीं
- बाज़ार मूल्य पर
- मूल लागत जमा प्रावधान पर
एक ही प्रश्न पूछो: “जमा कहाँ गया?” परिसंपत्ति खाते में → पद्धति 1। प्रावधान खाते में → पद्धति 2। नाम हमेशा मूल्यह्रास खाता होता है, और मूल्यह्रास खाता हमेशा लाभ-हानि में जाकर बंद होता है।
📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)
- खरीद प्रविष्टि: परिसंपत्ति खाता नाम, बैंक/रोकड़/आपूर्तिकर्ता से, स्थापना और भाड़े सहित पूरी लागत पर।
- पद्धति 1: मूल्यह्रास खाता नाम, परिसंपत्ति खाते से; तुलन-पत्र में परिसंपत्ति शुद्ध पुस्तक मूल्य पर।
- पद्धति 2: मूल्यह्रास खाता नाम, मूल्यह्रास प्रावधान खाते से; परिसंपत्ति लागत पर रहती है, प्रावधान (जमा शेष) उसमें से घटाया जाता है।
- दोनों में वर्ष के अंत में: लाभ-हानि खाता नाम, मूल्यह्रास खाते से; मूल्यह्रास खाते का कभी शेष नहीं रहता।
- दोनों पद्धतियों में लाभ समान रहता है; केवल प्रस्तुति अलग होती है।
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