सीधी रेखा पद्धति और क्रमागत ह्रास पद्धति
- सीधी रेखा पद्धति से मूल्यह्रास और उसकी दर निकाल पाओगे
- क्रमागत ह्रास पद्धति से वर्ष-दर-वर्ष मूल्यह्रास निकाल पाओगे
- वर्ष के बीच में खरीदी परिसंपत्ति पर वर्ष के भाग का मूल्यह्रास लगा पाओगे
- दोनों पद्धतियों की तुलना करके किसी परिसंपत्ति के लिए सही पद्धति चुन पाओगे
पिछले पाठ में हमने सीखा कि मूल्यह्रास क्या है। आज सीखेंगे कि यह कितना है। भारत में दो मुख्य पद्धतियाँ चलती हैं: सीधी रेखा पद्धति (Straight Line Method, SLM) और क्रमागत ह्रास पद्धति (Written Down Value Method, WDV)। एक हर वर्ष बराबर राशि लगाती है; दूसरी शुरू के वर्षों में ज़्यादा और बाद में कम। आज के अंत तक तुम किसी भी परिसंपत्ति की मूल्यह्रास तालिका बना पाओगे, वर्ष के बीच में खरीदी परिसंपत्ति की भी, जहाँ ज़्यादातर विद्यार्थी अंक गँवाते हैं।
1. दो पद्धतियाँ, एक विचार
दोनों पद्धतियाँ परिसंपत्ति की लागत को उसके उपयोगी जीवनकाल में बाँटती हैं। अंतर केवल इस आधार में है जिस पर प्रतिशत लगाया जाता है:
- SLM: हर वर्ष मूल लागत का एक निश्चित प्रतिशत → हर वर्ष बराबर राशि।
- WDV: हर वर्ष वर्ष के आरंभ के पुस्तक मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत → हर वर्ष घटती राशि।
NCERT दूसरी पद्धतियों का भी नाम लेती है (वार्षिकी, मूल्यह्रास कोष, बीमा पॉलिसी, वर्षों के अंकों का योग, दोहरी घटती शेष), पर व्यवहार और परीक्षा में SLM और WDV ही आती हैं। पद्धति का चुनाव परिसंपत्ति के प्रकार, उसके प्रयोग की प्रकृति और व्यापार की परिस्थितियों पर निर्भर है, और AS-6 के अनुसार उसे वर्ष-दर-वर्ष एकरूपता से अपनाना चाहिए; विशेष परिस्थितियों में ही बदला जा सकता है।
2. सीधी रेखा पद्धति (SLM)
SLM मानती है कि परिसंपत्ति का प्रयोग उसके जीवन के हर वर्ष में बराबर होता है। इसलिए हर वर्ष बराबर राशि लगाई जाती है। वार्षिक मूल्यह्रास को ग्राफ़ पर दिखाओ तो एक सीधी सपाट रेखा बनती है, इसी से यह नाम। इसे स्थायी किस्त पद्धति (Fixed instalment method) या मूल लागत पर स्थायी प्रतिशत पद्धति भी कहते हैं।
वार्षिक मूल्यह्रास = (लागत − अनुमानित शुद्ध अवशिष्ट मूल्य) ÷ अनुमानित उपयोगी जीवनकाल
मूल्यह्रास की दर (%) = (वार्षिक मूल्यह्रास ÷ लागत) × 100
- वार्षिक मूल्यह्रास = (5,00,000 − 50,000) ÷ 5 = 4,50,000 ÷ 5 = ₹90,000।
- दर = 90,000 ÷ 5,00,000 × 100 = 18% (मूल लागत पर)।
वर्ष आरंभिक पुस्तक मूल्य (₹) मूल्यह्रास (₹) अंतिम पुस्तक मूल्य (₹) 2026-27 5,00,000 90,000 4,10,000 2027-28 4,10,000 90,000 3,20,000 2028-29 3,20,000 90,000 2,30,000 2029-30 2,30,000 90,000 1,40,000 2030-31 1,40,000 90,000 50,000 योग 4,50,000
SLM में दर लागत (₹5,00,000) पर निकाली जाती है, मूल्यह्रास योग्य लागत (₹4,50,000) पर नहीं। 90,000 ÷ 4,50,000 = 20% एक आम गलत उत्तर है।
एक मशीन ₹3,60,000 में खरीदी गई और उसकी स्थापना पर ₹40,000 खर्च हुए। 8 वर्ष बाद उसका शुद्ध अवशिष्ट मूल्य ₹40,000 है। SLM में मूल्यह्रास की दर (%) क्या है?
2.1 SLM के लाभ
- समझने और लागू करने में बहुत सरल, इसलिए लोकप्रिय।
- परिसंपत्ति को ठीक उसके अवशिष्ट मूल्य (या शून्य) तक लाया जा सकता है, इसलिए पूरी मूल्यह्रास योग्य लागत जीवनकाल में वसूल हो जाती है।
- हर वर्ष समान राशि लगने से अलग-अलग वर्षों के लाभ की तुलना आसान होती है।
- उन परिसंपत्तियों के लिए उपयुक्त जिनका उपयोगी जीवनकाल ठीक-ठीक आँका जा सके और प्रयोग एक-सा हो, जैसे पट्टे वाले भवन, पेटेंट।
2.2 SLM की सीमाएँ
- यह हर वर्ष बराबर उपयोगिता मानती है, जो वास्तव में सही नहीं: नई परिसंपत्ति ज़्यादा सेवा देती है।
- परिसंपत्ति पुरानी होने पर कार्यक्षमता घटती है और मरम्मत का खर्च बढ़ता है। SLM में मूल्यह्रास वही रहता है और मरम्मत बढ़ती है, इसलिए लाभ-हानि खाते पर कुल भार (मूल्यह्रास + मरम्मत) हर वर्ष बढ़ता जाता है।
3. वर्ष के भाग का मूल्यह्रास
परिसंपत्तियाँ हमेशा लेखा वर्ष के पहले दिन नहीं खरीदी जातीं। जब तक प्रश्न कुछ और न कहे, पहले वर्ष में (और बिक्री के वर्ष में) केवल उतने महीनों का मूल्यह्रास लगाओ जितने महीने परिसंपत्ति प्रयोग हुई।
वर्ष के भाग का मूल्यह्रास = वार्षिक मूल्यह्रास × (प्रयोग के महीने ÷ 12)
- वार्षिक मूल्यह्रास = 2,40,000 का 10% = ₹24,000।
- 2026-27: 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक = 6 महीने → 24,000 × 6/12 = ₹12,000।
- 2027-28: पूरा वर्ष → ₹24,000।
महीने ऐसे गिनो: खरीद की तिथि से बहियाँ बंद होने की तिथि तक। 1 अक्टूबर से 31 मार्च = अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फ़रवरी, मार्च = 6। 1 जुलाई से 31 मार्च = 9। 1 जनवरी से 31 मार्च = 3।
₹1,20,000 का फर्नीचर 1 जनवरी 2027 को खरीदा गया। मूल लागत पर 15% वार्षिक मूल्यह्रास है; बहियाँ 31 मार्च को बंद होती हैं। 2026-27 का मूल्यह्रास (₹ में) कितना है?
4. क्रमागत ह्रास पद्धति (WDV)
WDV में हर वर्ष एक निश्चित प्रतिशत उस वर्ष के आरंभ के पुस्तक मूल्य (लागत घटाओ अब तक का मूल्यह्रास) पर लगाया जाता है। पुस्तक मूल्य घटता जाता है, इसलिए मूल्यह्रास भी घटता जाता है। इसे घटती शेष पद्धति (Reducing balance method) या ह्रासमान किस्त पद्धति भी कहते हैं।
नए स्कूटर के बारे में सोचो। पहले वर्ष में उसकी कीमत सबसे ज़्यादा गिरती है; कुछ वर्षों बाद हर वर्ष थोड़ी-सी ही गिरती है। WDV इसी ढंग की नकल करती है: शुरू में बड़ा मूल्यह्रास, बाद में छोटा, इस विचार पर कि नई परिसंपत्ति ज़्यादा लाभ देती है।
- 2026-27: 4,00,000 का 20% = ₹80,000 → WDV = 3,20,000।
- 2027-28: 3,20,000 का 20% = ₹64,000 → WDV = 2,56,000।
- 2028-29: 2,56,000 का 20% = ₹51,200 → WDV = 2,04,800।
वर्ष आरंभिक WDV (₹) मूल्यह्रास @ 20% (₹) अंतिम WDV (₹) 2026-27 4,00,000 80,000 3,20,000 2027-28 3,20,000 64,000 2,56,000 2028-29 2,56,000 51,200 2,04,800 योग 1,95,200
1 अप्रैल 2026 को ₹5,00,000 का एक जनरेटर खरीदा गया। क्रमागत ह्रास मूल्य पर 10% वार्षिक मूल्यह्रास है। तीसरे वर्ष, 2028-29 का मूल्यह्रास (₹ में) कितना है?
4.1 वर्ष के बीच में खरीद पर WDV
- 2026-27 (9 महीने: जुलाई से मार्च): 2,00,000 × 20% × 9/12 = ₹30,000 → WDV 1,70,000।
- 2027-28 (पूरा वर्ष): 1,70,000 का 20% = ₹34,000 → WDV 1,36,000।
- 2028-29 (पूरा वर्ष): 1,36,000 का 20% = ₹27,200 → WDV 1,08,800।
वर्ष के बीच की खरीद में समय का भाग (9/12) केवल पहले वर्ष में लगता है। दूसरे वर्ष से नए आरंभिक WDV पर पूरी दर लगाओ। हर वर्ष 9/12 से गुणा मत करते रहो।
4.2 WDV की दर निकालना
यदि लागत, अवशिष्ट मूल्य और जीवनकाल दिए हों, तो वह WDV दर जो जीवनकाल के अंत में परिसंपत्ति को ठीक अवशिष्ट मूल्य तक लाए:
R = [1 − (s ÷ c)1/n] × 100
R = मूल्यह्रास की दर (%), n = उपयोगी जीवनकाल (वर्ष), s = अवशिष्ट (कबाड़) मूल्य, c = परिसंपत्ति की लागत। (s ÷ c)1/n का अर्थ है s ÷ c का n-वाँ मूल।
- s ÷ c = 1,63,840 ÷ 5,00,000 = 0.32768।
- 0.32768 का पाँचवाँ मूल = 0.8 (क्योंकि 0.8 × 0.8 × 0.8 × 0.8 × 0.8 = 0.32768)।
- R = (1 − 0.8) × 100 = 20%।
4.3 WDV के लाभ और सीमाएँ
- अधिक वास्तविक विचार पर आधारित: परिसंपत्ति शुरू के वर्षों में ज़्यादा लाभ देती है, इसलिए तब ज़्यादा मूल्यह्रास लगता है।
- मूल्यह्रास घटता है और मरम्मत बढ़ती है, इसलिए मूल्यह्रास + मरम्मत का योग हर वर्ष लगभग बराबर रहता है।
- आयकर अधिनियम कर के लिए इस पद्धति को मान्यता देता है।
- लागत का बड़ा भाग शुरू में ही अपलिखित हो जाता है, इसलिए अप्रचलन से हानि घटती है; संयंत्र और मशीनरी, वाहन, कंप्यूटर जैसी परिसंपत्तियों के लिए उपयुक्त।
- सीमाएँ: परिसंपत्ति कभी शून्य तक अपलिखित नहीं हो सकती, क्योंकि किसी धनात्मक संख्या का प्रतिशत हमेशा उस संख्या से कम होता है; और उचित दर तय करना कठिन है।
5. मूल्यह्रास से खेलो
नीचे लागत, दर और वर्षों की संख्या बदलो और देखो कि SLM और WDV के आँकड़े कैसे बदलते हैं। SLM की सपाट रेखा और WDV का गिरता वक्र ध्यान से देखो।
6. SLM बनाम WDV: लाभ पर भार
- SLM मूल्यह्रास = हर वर्ष ₹10,000।
- WDV मूल्यह्रास: 20,000 (WDV 80,000), 16,000 (WDV 64,000), 12,800।
वर्ष मरम्मत (₹) SLM मूल्यह्रास (₹) SLM योग (₹) WDV मूल्यह्रास (₹) WDV योग (₹) 1 2,000 10,000 12,000 20,000 22,000 2 5,000 10,000 15,000 16,000 21,000 3 8,000 10,000 18,000 12,800 20,800
7. तुलना तालिका (बोर्ड का पसंदीदा प्रश्न)
| आधार | सीधी रेखा पद्धति | क्रमागत ह्रास पद्धति |
|---|---|---|
| 1. मूल्यह्रास का आधार | मूल लागत | वर्ष के आरंभ का पुस्तक मूल्य (लागत घटाओ अब तक का मूल्यह्रास) |
| 2. वार्षिक राशि | स्थिर, हर वर्ष समान | पहले वर्ष सबसे अधिक, हर वर्ष घटती |
| 3. मूल्यह्रास + मरम्मत | असमान; बाद के वर्षों में बढ़ता | हर वर्ष लगभग बराबर |
| 4. आयकर कानून | मान्य नहीं | मान्य |
| 5. अंत में पुस्तक मूल्य | शून्य या ठीक कबाड़ मूल्य हो सकता है | कभी शून्य नहीं होता |
| 6. उपयुक्तता | कम मरम्मत और कम अप्रचलन वाली परिसंपत्तियाँ, जैसे पट्टे वाले भवन, पेटेंट, ट्रेडमार्क | तकनीक से प्रभावित और उम्र के साथ अधिक मरम्मत माँगने वाली परिसंपत्तियाँ, जैसे संयंत्र और मशीनरी, वाहन |
- बिना अवशिष्ट मूल्य के SLM
- 4 वर्ष के लिए 25% पर SLM
- कोई भी पद्धति, यदि परिसंपत्ति की नियमित मरम्मत हो
- 100% से कम किसी भी दर पर WDV पद्धति
- सीधी रेखा पद्धति
- क्रमागत ह्रास पद्धति
- मूल्यह्रास नहीं, केवल मरम्मत
- कोई भी; दोनों में योग समान
SLM = समान राशि, शुरुआती लागत पर। WDV = घटते (बचे हुए) मूल्य पर। हर उत्तर में कार्यकारी टिप्पणी ज़रूर दिखाओ: लागत, दर, महीने, फिर राशि।
📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)
- SLM: वार्षिक मूल्यह्रास = (लागत − अवशिष्ट मूल्य) ÷ जीवनकाल; दर = वार्षिक मूल्यह्रास ÷ लागत × 100; हर वर्ष समान राशि।
- WDV: हर वर्ष आरंभिक पुस्तक मूल्य का निश्चित %; राशि हर वर्ष घटती है; मूल्य कभी शून्य नहीं होता।
- वर्ष का भाग: प्रयोग के महीने ÷ 12 से गुणा करो, केवल खरीद (या बिक्री) के वर्ष में।
- WDV दर का सूत्र: R = [1 − (s ÷ c)^(1/n)] × 100।
- SLM में (मूल्यह्रास + मरम्मत) समय के साथ बढ़ता है; WDV में लगभग बराबर रहता है; आयकर कानून WDV को मानता है।
- SLM पट्टे वाले भवन, पेटेंट के लिए; WDV संयंत्र, मशीनरी, वाहन के लिए उपयुक्त।
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