लेखांकन के सैद्धांतिक आधार
पहले कॉपी-पेन ले लो। हर प्रश्न खुद हल करो, फिर विकल्प चुनो। पहली बार जो चुना वही स्कोर में गिना जाएगा, इसलिए जल्दबाज़ी मत करना।
भाग A: MCQ (हर एक 1 अंक)
- निरंतरता
- व्यावसायिक इकाई
- मुद्रा मापन
- सारता
- वित्तीय वर्ष 2027-28, जब नकद मिला
- वित्तीय वर्ष 2026-27, जब बिक्री हुई
- दोनों वर्षों का बराबर
- जब तक ग्राहक पुष्टि न करे, किसी वर्ष का नहीं
- रूढ़िवादिता
- एकरूपता
- सारता
- लागत
- रूढ़िवादिता
- वस्तुनिष्ठता
- मिलान
- निरंतरता
- ₹3,00,000
- ₹3,10,000
- ₹3,15,000
- ₹3,25,000
- CGST और SGST
- केवल SGST
- IGST
- केवल CGST
- SEBI
- भारतीय रिज़र्व बैंक
- भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI)
- GST परिषद
- निरंतरता
- एकरूपता
- उपार्जन
- रूढ़िवादिता
कारण (R): व्यावसायिक इकाई अवधारणा के अनुसार व्यवसाय और उसके स्वामी को अलग-अलग इकाइयाँ माना जाता है।
- अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- अभिकथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
- अभिकथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
कारण (R): रोकड़ आधार में प्रविष्टियाँ तभी होती हैं जब नकद वास्तव में प्राप्त या भुगतान हो।
- अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- अभिकथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
- अभिकथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
भाग B: परीक्षा जैसे प्रश्न
मुद्रा मापन अवधारणा समझाइए। इस अवधारणा की एक सीमा बताइए।
मुद्रा मापन अवधारणा: केवल वे लेन-देन और घटनाएँ लेखा पुस्तकों में लिखी जाती हैं जिन्हें मुद्रा में व्यक्त किया जा सके। जैसे, ₹20,000 के माल की बिक्री लिखी जाती है, पर किसी योग्य मैनेजर की नियुक्ति या कर्मचारियों की हड़ताल नहीं लिखी जाती।
लेखे मुद्रा इकाई (₹) में रखे जाते हैं, भौतिक इकाइयों में नहीं। एकड़ में ज़मीन, किलो में स्टॉक और संख्या में कंप्यूटर जोड़े नहीं जा सकते, पर उनके रुपये वाले मूल्य जोड़कर कुल परिसंपत्तियाँ निकाली जा सकती हैं।
सीमा: बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रा का मूल्य समय के साथ बदलता है। 2008 में ₹20 लाख में खरीदा भवन और 2026 में ₹20 लाख में खरीदी मशीन ऐसे जोड़ दिए जाते हैं मानो दोनों रुपयों का मूल्य बराबर हो, इसलिए पुस्तकें सत्य और उचित तस्वीर नहीं दिखा पातीं।
आगम मान्यता अवधारणा के अनुसार आगम कब माना जाता है? सामान्य नियम के दो अपवाद बताइए। शर्मा ट्रेडर्स (वर्ष समाप्ति 31 मार्च 2027) के लिए बताइए कि प्रत्येक मद वित्तीय वर्ष 2026-27 का आगम है या नहीं: (a) 29 मार्च 2027 को ₹40,000 का ऑर्डर मिला, माल 4 अप्रैल 2027 को पहुँचाया; (b) मार्च 2027 का ₹5,000 कमीशन 10 अप्रैल 2027 को मिला।
आगम तब माना जाता है जब वह वसूल हो, यानी जब उसे पाने का कानूनी अधिकार बने: जब माल बेचा जाए या सेवा दी जाए, न कि जब नकद मिले।
अपवाद: (i) दीर्घकालीन अनुबंधों (जैसे निर्माण) में हर वर्ष पूरे हुए काम के अनुपात में आगम माना जाता है। (ii) किराया-क्रय बिक्री में किस्तों में वसूली गई राशि को वसूल माना जाता है।
(a) वित्तीय वर्ष 2026-27 का आगम नहीं। माल अप्रैल 2027 में पहुँचाया गया, इसलिए यह वित्तीय वर्ष 2027-28 का आगम है। (b) हाँ, वित्तीय वर्ष 2026-27 का आगम, क्योंकि कमीशन समय के आधार पर माना जाता है और यह मार्च 2027 से संबंधित है।
गुप्ता इलेक्ट्रिकल्स के वित्तीय वर्ष 2026-27 की सूचना: कुल विक्रय ₹8,00,000 (नकद ₹5,00,000; उधार ₹3,00,000, जिसमें से ₹2,40,000 वर्ष में वसूल हुए); किए गए व्यय ₹5,50,000, जिनमें से ₹50,000 अभी बकाया हैं; वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए ₹20,000 कमीशन अग्रिम मिला। (i) रोकड़ आधार और (ii) उपार्जन आधार पर लाभ की गणना कीजिए। कौन-सा आँकड़ा अधिक उचित है और क्यों?
(i) रोकड़ आधार:
प्राप्तियाँ = 5,00,000 + 2,40,000 + 20,000 = ₹7,60,000
भुगतान = 5,50,000 − 50,000 = ₹5,00,000
लाभ = 7,60,000 − 5,00,000 = ₹2,60,000
(ii) उपार्जन आधार:
अर्जित आगम = ₹8,00,000 (अगले वर्ष का अग्रिम कमीशन शामिल नहीं)
किए गए व्यय = ₹5,50,000
लाभ = 8,00,000 − 5,50,000 = ₹2,50,000
उपार्जन आधार का ₹2,50,000 का लाभ अधिक उचित है, क्योंकि यह वर्ष में अर्जित आगम का मिलान उसे कमाने के लिए किए गए व्ययों से करता है (मिलान अवधारणा), जबकि रोकड़ आधार केवल नकद के आने-जाने के समय पर निर्भर है।
लेखांकन मानक क्या हैं? लेखांकन मानकों के कोई दो लाभ और कोई दो सीमाएँ बताइए।
अर्थ: लेखांकन मानक किसी विशेषज्ञ लेखांकन संस्था (भारत में ICAI) द्वारा जारी लिखित नीति-प्रलेख हैं, जो वित्तीय विवरणों में लेन-देनों की मान्यता, मापन, व्यवहार, प्रस्तुति और प्रकटीकरण से जुड़े हैं। इनका उद्देश्य एकरूपता और तुलनीयता है।
लाभ: (i) ये लेखांकन व्यवहार की भिन्नताएँ दूर करते हैं, जिससे वित्तीय विवरण एकसमान बनते हैं। (ii) ये विवरणों को उद्यमों के बीच और वर्षों के बीच तुलनीय बनाते हैं; ये ऐसे उपयोगी प्रकटीकरण भी माँग सकते हैं जो कानून में ज़रूरी नहीं।
सीमाएँ: (i) ये वैकल्पिक लेखांकन व्यवहारों में चुनाव कठिन बनाते हैं और कठोरता से लागू होते हैं। (ii) ये कानून से ऊपर नहीं हो सकते; इन्हें मौजूदा कानूनों के दायरे में बनाना होता है।
पूजा ने अपने पिता की दुकान "पूजा इलेक्ट्रॉनिक्स" के वित्तीय वर्ष 2026-27 के लेखे बनाने में मदद की। बैंक ने उन पर भरोसा करने से मना कर दिया। प्रत्येक स्थिति में उल्लंघन हुई अवधारणा पहचानिए और सही व्यवहार बताइए:
(a) ₹18 लाख में खरीदा गया दुकान भवन उसके वर्तमान बाज़ार मूल्य ₹35 लाख पर दिखाया गया।
(b) पिछले वर्ष स्टॉक का मूल्यांकन लागत पर हुआ था; इस वर्ष बिना प्रकटीकरण के दूसरी पद्धति अपनाई गई, जिससे स्टॉक का मूल्य लगभग 12% बढ़ गया।
(c) 3 वर्ष के उपयोगी जीवनकाल वाला ₹90,000 का लैपटॉप पूरा इसी वर्ष के लाभ पर डाल दिया गया।
(d) पिता का घर का ₹4,000 का बिजली बिल, जो दुकान के नकद से चुकाया गया, दुकान का व्यय दिखाया गया।
(e) ₹50,000 लागत और ₹60,000 बाज़ार मूल्य वाला माल ₹60,000 पर दिखाया गया।
(f) 30 मार्च 2027 को मिला ₹25,000 का ऑर्डर, जिसकी सुपुर्दगी अप्रैल 2027 में होनी है, विक्रय में शामिल किया गया।
(a) लागत अवधारणा (और वस्तुनिष्ठता): परिसंपत्तियाँ ऐतिहासिक लागत पर लिखी जाती हैं। भवन ₹18 लाख (मूल्यह्रास घटाकर) पर दिखाओ, बाज़ार मूल्य पर नहीं।
(b) एकरूपता अवधारणा: हर वर्ष वही पद्धति अपनाई जानी चाहिए; बदलने पर बदलाव और उसका प्रभाव प्रकट करना होगा।
(c) निरंतरता / मिलान अवधारणा: लागत उपयोगी जीवनकाल पर फैलाई जानी चाहिए, जैसे 3 वर्ष तक ₹30,000 प्रति वर्ष, एक ही वर्ष में पूरी नहीं।
(d) व्यावसायिक इकाई अवधारणा: यह स्वामी का निजी खर्च है; ₹4,000 को आहरण मानो, दुकान का व्यय नहीं।
(e) रूढ़िवादिता अवधारणा: अवसूल लाभ नहीं लिखे जाते; स्टॉक लागत और बाज़ार मूल्य में जो कम हो, यानी ₹50,000 पर दिखाओ।
(f) आगम मान्यता अवधारणा: ऑर्डर बिक्री नहीं है; आगम अप्रैल 2027 में सुपुर्दगी पर ही बनेगा, इसलिए ₹25,000 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के विक्रय से बाहर रखो।
मीना लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में "मीना मोबाइल्स" चलाती है। मोबाइल पर GST दर 18% है। अप्रैल 2026 में:
• उसने कानपुर (उ.प्र.) के एक ग्राहक को ₹20,000 के फ़ोन बेचे।
• उसने पटना (बिहार) के एक डीलर को ₹30,000 के फ़ोन बेचे।
• 30 अप्रैल को उसे ₹15,000 का ऑर्डर मिला; फ़ोन 3 मई को पहुँचाए गए।
• दुकान का अप्रैल का ₹2,000 का बिजली बिल 5 मई को चुकाया गया।
(i) कानपुर वाली बिक्री पर GST, हर घटक दिखाते हुए, निकालिए। (1)
(ii) पटना वाली बिक्री पर GST निकालिए और कर का नाम बताइए। (1)
(iii) ₹15,000 का ऑर्डर किस महीने का आगम है? अवधारणा का नाम बताइए। (1)
(iv) ₹2,000 का बिजली बिल किस महीने के लाभ पर डाला जाएगा? अवधारणा का नाम बताइए। (1)
(i) अंतःराज्यीय बिक्री: CGST = 20,000 का 9% = ₹1,800; SGST = 20,000 का 9% = ₹1,800।
(ii) अंतरराज्यीय बिक्री: IGST = 30,000 का 18% = ₹5,400।
(iii) मई, जब फ़ोन पहुँचाए गए: आगम मान्यता अवधारणा (ऑर्डर बिक्री नहीं है)।
(iv) अप्रैल, क्योंकि बिजली अप्रैल का आगम कमाने में अप्रैल में प्रयोग हुई: मिलान अवधारणा (उपार्जन आधार)।
इस अध्याय के टॉपर स्तर के 4 HOTS प्रश्न, संकेत और पूरे हल के साथ।