₹AccountsDostकक्षा 11 · लेखाशास्त्र 🔥 0⭐ 0
नींव · पाठ 3 / 3 · ⏱ 30 मिनट

बिल, पास बुक और नाम/जमा तालिकाएँ पढ़ना

🎯 इस पाठ के बाद आप यह कर पाओगे:
  • GST कर बीजक का हर हिस्सा पढ़ो और उसके योग जाँचो
  • बैंक पास बुक पढ़ो और चलता शेष निकालो
  • दो-पक्षीय तालिकाएँ (बायाँ पक्ष नाम, दायाँ पक्ष जमा) समझो और शेष की राशि निकालो
  • पढ़ने की वे आदतें सीखो जो लेखांकन में छोटी ग़लतियाँ रोकती हैं

लेखांकन तालिकाओं में लिखा जाता है। बिल एक तालिका है, बैंक पास बुक एक तालिका है, रोज़नामचा, खाता बही, रोकड़ बही और तलपट सब तालिकाएँ हैं। कई विद्यार्थी बात समझ लेते हैं पर अंक इसलिए खोते हैं कि तालिका ग़लत पढ़ते हैं: ग़लत खाना जोड़ देते हैं, कोई पंक्ति छोड़ देते हैं, या बायाँ-दायाँ पक्ष उलझा देते हैं। आज हम तीन तरह की तालिकाएँ एक लेखाकार की तरह पढ़ना सीखेंगे: GST बिल, बैंक पास बुक और दो-पक्षीय नाम/जमा खाता। पेन उठाओ; हर योग ख़ुद जाँचेंगे।

1. पंक्तियाँ, खाने (स्तंभ) और योग

पंक्ति (Row) बाएँ से दाएँ चलती है और आमतौर पर एक वस्तु या एक लेन-देन दिखाती है। खाना या स्तंभ (Column) ऊपर से नीचे चलता है और एक तरह की जानकारी (तिथि, नाम, मात्रा, राशि) दिखाता है। पहली पंक्ति, जिसे शीर्षक कहते हैं, बताती है कि हर खाने में क्या है। हमेशा पहले शीर्षक पढ़ो।

तीन आदतें: (1) कोई भी संख्या देखने से पहले हर खाने का शीर्षक पढ़ो। (2) राशि वाले खाने को दो बार जोड़ो, एक बार ऊपर से नीचे और एक बार नीचे से ऊपर। (3) तालिका में योग दिया हो तो उसे जाँचो; आँख बंद करके भरोसा मत करो। लेखाकार खाना जोड़ने को योग लगाना (Casting) कहते हैं, और ग़लत योग योग की अशुद्धि है (यह अध्याय 6 में आएगा)।

2. GST कर बीजक पढ़ना

कर बीजक (Tax invoice) या बिल विक्रेता ख़रीदार को देता है। यह विक्रेता के लिए बिक्री का और ख़रीदार के लिए ख़रीद का प्रमाण है। लेखांकन में ऐसे काग़ज़ों को स्रोत प्रलेख (Source documents) कहते हैं, क्योंकि हर प्रविष्टि इन्हीं से शुरू होती है।

अल्पाइन बैग्स एंड कं., अलीगढ़ शर्मा स्टेशनरी, खुर्जा को स्कूल बैग और पानी की बोतलें बेचता है (दोनों उ.प्र. में)। 10 अप्रैल 2026 को शर्मा जी को मिले बिल का सरल रूप यह है।

कर बीजक सं. AB/112 · तिथि: 10-04-2026
विक्रेता: अल्पाइन बैग्स एंड कं., अलीगढ़ (GSTIN 09XXXXX) · ख़रीदार: शर्मा स्टेशनरी, खुर्जा (GSTIN 09YYYYY)
क्र.सं.वस्तुमात्रादर (₹)राशि (₹)
1स्कूल बैग106006,000
2पानी की बोतल201503,000
सकल राशि9,000
घटाओ: व्यापारिक बट्टा @ 5%450
कर योग्य मूल्य8,550
जोड़ो: CGST @ 6%513
जोड़ो: SGST @ 6%513
बीजक का कुल योग9,576

हर हिस्सा क्या बताता है:

  • बीजक संख्या और तिथि: हर बिल की अपनी अलग संख्या होती है। तिथि तय करती है कि ख़रीद किस महीने की है।
  • GSTIN के साथ विक्रेता और ख़रीदार: GSTIN GST पंजीकरण संख्या है। इसके पहले दो अंक राज्य कोड हैं (09 उत्तर प्रदेश है)। दोनों पर एक ही राज्य कोड → CGST + SGST।
  • हर पंक्ति में मात्रा × दर = राशि।
  • व्यापारिक बट्टा कर से पहले घटता है।
  • कर योग्य मूल्य: वह राशि जिस पर GST निकलता है।
  • बीजक का कुल योग: जो ख़रीदार को असल में चुकाना है।
ऊपर के बीजक का हर अंक जाँचो।
  1. पंक्ति 1: 10 × ₹600 = ₹6,000 ✓। पंक्ति 2: 20 × ₹150 = ₹3,000 ✓। सकल = ₹9,000 ✓
  2. व्यापारिक बट्टा = ₹9,000 का 5% = ₹450 ✓। कर योग्य मूल्य = ₹9,000 − ₹450 = ₹8,550 ✓
  3. CGST = ₹8,550 का 6% = ₹513 ✓ और SGST भी उतना ही ✓ (12% GST दो बराबर हिस्सों में)
  4. कुल = ₹8,550 + ₹513 + ₹513 = ₹9,576 ✓
बीजक सही है। शर्मा जी की पुस्तकों में क्रय = ₹8,550, आगत CGST = ₹513, आगत SGST = ₹513 और देय राशि = ₹9,576। ₹450 का व्यापारिक बट्टा कहीं दर्ज नहीं होता।

बुलंदशहर का एक फर्नीचर विक्रेता खुर्जा के एक कोचिंग सेंटर (उसी राज्य में) को ₹1,200 प्रति कुर्सी की दर से 5 कुर्सियाँ बेचता है। GST 18%, कोई बट्टा नहीं। बीजक का कुल योग (₹ में) कितना है?

राशि = 5 × 1,200। फिर CGST 9% + SGST 9%।
कर योग्य मूल्य = ₹6,000। CGST = ₹540, SGST = ₹540। बीजक का कुल = ₹6,000 + ₹540 + ₹540 = ₹7,080।

3. बैंक पास बुक पढ़ना

जब व्यापार बैंक में पैसा रखता है, तो बैंक सारी जमाओं और निकासियों का रिकॉर्ड देता है। छोटी पुस्तिका वाले रूप को पास बुक (Pass book) कहते हैं; छपे या ई-मेल से आए पन्ने को बैंक विवरण (Bank statement)। दोनों ऐसे दिखते हैं:

तिथिविवरणनिकासी (₹)जमा (₹)शेष (₹)
अप्रैल 1प्रारंभिक शेष25,000 Cr
अप्रैल 3नकद जमा किया10,00035,000 Cr
अप्रैल 7चेक सं. 4521 – गुप्ता होलसेलर्स8,00027,000 Cr
अप्रैल 12UPI प्राप्त – वर्मा कोचिंग4,50031,500 Cr
अप्रैल 20बैंक प्रभार15031,350 Cr
अप्रैल 25ATM निकासी5,00026,350 Cr
  • निकासी (नाम या Dr खाना भी कहते हैं): खाते से बाहर जाने वाला पैसा, जैसे चुकाए गए चेक, ATM नकदी, बैंक प्रभार।
  • जमा (Cr खाना भी कहते हैं): खाते में आने वाला पैसा, जैसे जमा की गई नकदी, मिले UPI या चेक, ब्याज।
  • शेष: हर पंक्ति के बाद चलता योग: पिछला शेष + जमा − निकासी।

बैंक तुम्हारे शेष के आगे "Cr" क्यों लिखता है? क्योंकि पास बुक बैंक की दृष्टि से लिखी जाती है। तुम्हारा पैसा बैंक पर तुम्हारा बाकी है, इसलिए बैंक के लिए तुम लेनदार हो। तुम्हारी अपनी रोकड़ बही में वही बैंक शेष नाम पक्ष में, तुम्हारी परिसंपत्ति के रूप में, दिखता है। यह "दर्पण प्रतिबिंब" अध्याय 5, बैंक समाधान विवरण का मुख्य विचार है।

ऊपर की पास बुक का अंतिम शेष एक ही चरण में जाँचो।
  1. कुल जमा = ₹10,000 + ₹4,500 = ₹14,500
  2. कुल निकासी = ₹8,000 + ₹150 + ₹5,000 = ₹13,150
  3. अंतिम शेष = ₹25,000 + ₹14,500 − ₹13,150
₹26,350, जो अंतिम पंक्ति से मेल खाता है। ✓

एक पास बुक में प्रारंभिक शेष ₹12,000 है। फिर: जमा ₹6,000, निकासी ₹9,500, जमा ₹2,300। अंतिम शेष (₹ में) कितना है?

क्रम से जमा जोड़ो, निकासी घटाओ।
₹12,000 + ₹6,000 = ₹18,000; − ₹9,500 = ₹8,500; + ₹2,300 = ₹10,800।
बैंक द्वारा काटे गए ₹150 बैंक प्रभार पास बुक के किस खाने में दिखेंगे?
  • निकासी (Dr) खाने में
  • जमा (Cr) खाने में
  • सिर्फ़ शेष वाले खाने में
  • पास बुक में दिखेंगे ही नहीं
बैंक प्रभार खाते से पैसा बाहर ले जाते हैं, इसलिए ये निकासी (Dr) खाने में दिखते हैं और शेष घटाते हैं।

4. दो-पक्षीय तालिकाएँ: नाम पक्ष और जमा पक्ष

ज़्यादातर खाता पुस्तकें दो पक्षों में बनती हैं। बाएँ पक्ष को नाम पक्ष (Dr.) (Debit side) और दाएँ पक्ष को जमा पक्ष (Cr.) (Credit side) कहते हैं। अभी इन शब्दों में "अच्छा" या "बुरा" अर्थ मत ढूँढो; अभी बस नाम = बायाँ और जमा = दायाँ पढ़ो। कौन-सी चीज़ किस पक्ष में जाती है, यह अध्याय 3 ठीक-ठीक सिखाएगा।

एक बहुत पुरानी और आसान दो-पक्षीय तालिका दुकान का नकदी रजिस्टर है: प्राप्त पैसा बाईं ओर, चुकाया पैसा दाईं ओर।

प्राप्तियाँ (नाम पक्ष)भुगतान (जमा पक्ष)
विवरण₹विवरण₹
प्रारंभिक नकदी5,000किराया4,000
नकद विक्रय12,000मज़दूरी2,500
वर्मा से प्राप्त3,000नकद क्रय7,000
अंतिम नकदी (शेष)6,500
योग20,000योग20,000
₹6,500 की अंतिम नकदी कैसे निकली, और दोनों योग ₹20,000 क्यों हैं?
  1. प्राप्ति पक्ष का योग = ₹5,000 + ₹12,000 + ₹3,000 = ₹20,000
  2. भुगतान पक्ष का योग (शेष से पहले) = ₹4,000 + ₹2,500 + ₹7,000 = ₹13,500
  3. अंतर = ₹20,000 − ₹13,500 = ₹6,500। यह नकदी अभी भी गल्ले में है।
  4. ₹6,500 को छोटे पक्ष (भुगतान) में "अंतिम शेष" लिखो, ताकि दोनों पक्षों का योग ₹20,000 हो।
अंतिम नकदी ₹6,500। अंतर को छोटे पक्ष में लिखकर दोनों पक्ष बराबर करना खातों का शेष निकालना (Balancing) कहलाता है। अध्याय 3 में तुम हर खाते के साथ ठीक यही करोगे।

शेष की राशि = बड़े पक्ष का योग − छोटे पक्ष का योग। इसे छोटे पक्ष में लिखते हैं, और फिर दोनों पक्षों का योग बराबर दिखता है।

विद्यार्थी अक्सर शेष बड़े पक्ष में लिख देते हैं, जिससे अंतर शून्य होने की जगह दुगना हो जाता है। याद रखो: शेष वहाँ जाता है जहाँ पैसा कम है, ताकि कमी भर जाए।

एक दो-पक्षीय खाते में नाम पक्ष का योग ₹48,500 और जमा पक्ष का ₹36,200 है। शेष की कितनी राशि (₹ में) लिखनी होगी, और किस पक्ष में?

बड़ा घटा छोटा; छोटे पक्ष में लिखो।
₹48,500 − ₹36,200 = ₹12,300, जमा पक्ष (छोटे पक्ष) में लिखो। फिर दोनों पक्षों का योग ₹48,500 होगा।

5. रोज़नामचे के नाम और जमा खानों की पहली झलक

रोज़नामचा (Journal), यानी लेखे की पहली पुस्तक, में दो अलग पक्षों की जगह राशि के खाने अगल-बगल होते हैं: नाम राशि (₹) का खाना और जमा राशि (₹) का खाना। हर लेन-देन दोनों खानों में बराबर राशि के साथ लिखा जाता है। सिर्फ़ इसका रूप देखो; नियमों की चिंता अभी मत करो:

तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2026
अप्रैल 1
रोकड़ खाता नाम2,00,000
पूँजी खाते से2,00,000
(व्यापार रोकड़ से प्रारंभ किया)

इसे ऐसे पढ़ो: "1 अप्रैल 2026 को रोकड़ खाता ₹2,00,000 से नाम और पूँजी खाता जमा किया गया, क्योंकि मालिक ने नकदी से व्यापार शुरू किया।" कोष्ठक वाली पंक्ति संक्षिप्त विवरण (नैरेशन) (Narration) है। ब.पृ.सं. यानी बही पृष्ठ संख्या (L.F.), खाता बही का पृष्ठ क्रमांक, जो बाद में भरा जाता है।

हर रोज़नामचा प्रविष्टि और हर तलपट में: नाम खाने का योग = जमा खाने का योग। अगर दोनों खाने मेल न खाएँ, तो कहीं ग़लती है। यह एक जाँच तुम्हारे कई अंक बचाएगी।

एक रोज़नामचे में नाम राशि के खाने का योग ₹85,000 और जमा राशि के खाने का योग ₹84,100 है। तुम्हें क्या निष्कर्ष निकालना चाहिए?
  • व्यापार ने ₹900 लाभ कमाया
  • व्यापार को ₹900 हानि हुई
  • लिखने या जोड़ने में कहीं अशुद्धि है
  • कुछ नहीं, दोनों योग कभी बराबर नहीं होते
हर प्रविष्टि में नाम और जमा राशि बराबर होती है, इसलिए दोनों खानों के योग बराबर होने चाहिए। ₹900 का अंतर किसी राशि को लिखने या खाना जोड़ने की ग़लती दिखाता है। इसका लाभ या हानि से कोई संबंध नहीं।

📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)

  • पहले खानों के शीर्षक पढ़ो; हर योग दो बार जोड़कर जाँचो।
  • कर बीजक: मात्रा × दर → सकल → घटाओ व्यापारिक बट्टा → कर योग्य मूल्य → जोड़ो GST → बीजक का कुल।
  • पास बुक: निकासी शेष घटाती है, जमा बढ़ाती है; "Cr" शेष बैंक की दृष्टि से है।
  • दो-पक्षीय तालिका: नाम = बायाँ, जमा = दायाँ; शेष = बड़ा योग − छोटा योग, छोटे पक्ष में लिखो।
  • रोज़नामचे और तलपट में नाम योग हमेशा जमा योग के बराबर होना चाहिए।

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