लेखांकन के मूल शब्द: जो हर दिन काम आएँगे
- इकाई, लेन-देन, परिसंपत्तियाँ, देयताएँ और पूँजी उदाहरण सहित समझा पाओगे
- आगम, व्यय, खर्च, लाभ, अभिलाभ और हानि में अंतर कर पाओगे
- बट्टा, प्रमाणक, माल, आहरण, क्रय, विक्रय और स्टॉक समझ पाओगे
- देनदार और लेनदार पहचान पाओगे और मदों का सही वर्गीकरण कर पाओगे
हर भाषा की एक मूल शब्दावली होती है। अंग्रेज़ी बोलने से पहले "book", "run", "happy" जैसे शब्द चाहिए। लेखांकन व्यापार की भाषा है, और आज हम इसके बीस मूल शब्द सीखेंगे। ये शब्द इसके बाद हर अध्याय में आएँगे: रोज़नामचे में, खाता बही में, तलपट में, हर जगह। इसलिए जल्दबाज़ी नहीं करेंगे। हर शब्द का सरल अर्थ, दुकान का असली उदाहरण और जहाँ छात्र अक्सर उलझते हैं, वहाँ चेतावनी मिलेगी। अंत तक तुम किसी छोटे व्यापार की कहानी पढ़कर खुद पूँजी, परिसंपत्तियाँ, लेनदार, अभिलाभ और हानि पहचान सकोगे।
1. इकाई और लेन-देन
इकाई (Entity) का अर्थ है ऐसी वास्तविकता जिसका निश्चित अलग अस्तित्व हो। व्यावसायिक इकाई एक विशेष रूप से पहचाना जा सकने वाला व्यावसायिक उद्यम है, जैसे शर्मा किराना स्टोर, मेहता मोबाइल स्टोर या रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लि.। लेखा प्रणाली हमेशा किसी विशेष व्यावसायिक इकाई (जिसे लेखा इकाई भी कहते हैं) के लिए बनाई जाती है।
यह क्यों ज़रूरी है? क्योंकि शर्मा किराना स्टोर की पुस्तकों में केवल दुकान के लेन-देन लिखे जाते हैं, रमेश अंकल के परिवार के खर्च नहीं। लेखांकन में दुकान और उसका मालिक दो अलग "व्यक्ति" माने जाते हैं।
लेन-देन (Transaction): दो या अधिक इकाइयों के बीच कुछ मूल्य से जुड़ी घटना, जैसे माल की खरीद, पैसे की प्राप्ति, लेनदार को भुगतान या कोई व्यय करना।
- नकद लेन-देन: भुगतान तुरंत किया या लिया जाता है (नकद, UPI, कार्ड)। उदाहरण: ₹499 का चार्जर बेचा और UPI से पैसे मिले।
- उधार लेन-देन: भुगतान बाद में किया या लिया जाएगा। उदाहरण: कपूर एक्सेसरीज़ से 50 फ़ोन कवर ₹7,500 में ख़रीदे, भुगतान 30 दिन में।
लेखांकन के लिए UPI, डेबिट कार्ड या चेक से किया गया ऐसा भुगतान, जो सौदा तुरंत निपटा दे, स्वभाव से "नकद" लेन-देन ही है, क्योंकि कोई उधार अवधि नहीं है। भुगतान आगे टलने पर ही वह उधार लेन-देन होता है।
2. परिसंपत्तियाँ
परिसंपत्तियाँ (Assets) उद्यम के ऐसे आर्थिक संसाधन हैं जिन्हें मुद्रा में उपयोगी रूप से व्यक्त किया जा सके। ये मूल्यवान मदें हैं जिनका उपयोग व्यापार अपने कामकाज में करता है और जिनसे उसे भविष्य में आर्थिक लाभ मिलता है।
किराना स्टोर की डिलीवरी वैन एक परिसंपत्ति है: इससे स्टोर माल पहुँचाकर पैसा कमाता है। परिसंपत्तियाँ दो प्रकार की होती हैं:
| गैर-चालू परिसंपत्तियाँ | चालू परिसंपत्तियाँ |
|---|---|
| लंबे समय तक उपयोग के लिए, बेचने के लिए नहीं; लाभ एक साल से ज़्यादा | रोकड़ या ऐसी मदें जो 12 महीने (या परिचालन चक्र) में रोकड़ में बदलेंगी, बिकेंगी या ख़र्च हो जाएँगी |
| संपत्ति, संयंत्र और उपकरण (मूर्त): भूमि व भवन, मशीनरी, फर्नीचर, मोटर वाहन, कंप्यूटर, एयर-कंडीशनर | रहतिया (स्टॉक): माल का स्टॉक, कच्चा माल, छोटे औज़ार |
| अमूर्त परिसंपत्तियाँ: ख्याति (goodwill), पेटेंट, ट्रेडमार्क, कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर | व्यापारिक प्राप्य: देनदार, प्राप्य बिल |
| गैर-चालू निवेश, दीर्घकालीन ऋण और अग्रिम, अन्य गैर-चालू परिसंपत्तियाँ | रोकड़ और रोकड़ तुल्य: हाथ में रोकड़, बैंक में रोकड़; चालू निवेश; अल्पकालीन ऋण और अग्रिम; अन्य चालू परिसंपत्तियाँ |
मूर्त (Tangible) = छू सकते हो (वैन, मेज़)। अमूर्त (Intangible) = छू नहीं सकते पर मूल्य है (मशहूर ब्रांड नाम, पेटेंट, सॉफ़्टवेयर)।
3. देयताएँ और पूँजी
देयताएँ (Liabilities) वे दायित्व या ऋण हैं जो उद्यम को भविष्य में किसी समय चुकाने हैं। ये फ़र्म की परिसंपत्तियों पर लेनदारों के दावे दर्शाती हैं।
लगभग हर व्यापार कभी न कभी पैसा उधार लेता है या उधार पर माल ख़रीदता है। अगर शर्मा किराना स्टोर 25 मार्च 2027 को एक महीने के उधार पर ₹25,000 का माल ख़रीदता है, तो 31 मार्च 2027 के तुलन पत्र में सप्लायर देयता पक्ष में लेनदार के रूप में दिखेगा। बैंक से तीन साल का ऋण भी देयता है।
| गैर-चालू देयताएँ | चालू देयताएँ |
|---|---|
| दीर्घकालीन उधार (जैसे 5 साल का बैंक ऋण, ऋणपत्र), आस्थगित कर देयताएँ (शुद्ध), अन्य दीर्घकालीन देयताएँ, दीर्घकालीन प्रावधान | अल्पकालीन उधार (जैसे बैंक अधिविकर्ष), व्यापारिक देय (लेनदार, देय बिल), अन्य चालू देयताएँ, अल्पकालीन प्रावधान |
चालू या गैर-चालू? चार संकेत। कोई मद चालू है अगर वह (1) परिचालन चक्र में शामिल है, (2) 12 महीने में वसूल या निपटाई जाएगी, (3) मुख्यतः व्यापार के लिए रखी है, या (4) रोकड़ या रोकड़ तुल्य है।
पूँजी (Capital) वह राशि है जो मालिक फ़र्म में लगाता है। यह रोकड़ या परिसंपत्तियों के रूप में लाई जा सकती है। व्यावसायिक इकाई के लिए पूँजी एक दायित्व और उसकी परिसंपत्तियों पर एक दावा है, इसलिए यह तुलन पत्र के देयता पक्ष में दिखाई जाती है।
छात्र पूछते हैं: "पैसा तो मालिक ने दिया, फिर पूँजी देयता क्यों?" इकाई वाली बात याद करो: व्यापार और मालिक अलग हैं। व्यापार ने मालिक से पैसा लिया है और एक तरह से उसे वापस देना है। इसलिए पूँजी देयताओं के साथ दिखाई जाती है।
4. विक्रय, आगम और व्यय
विक्रय (Sales) ग्राहकों को बेचे गए माल या दी गई सेवाओं से कुल आगम है। विक्रय नकद भी हो सकता है और उधार भी।
आगम (Revenues) वह राशि है जो व्यापार अपने उत्पाद बेचकर या सेवाएँ देकर कमाता है (विक्रय आगम), और अन्य कमाई जैसे कमीशन, ब्याज, लाभांश, रॉयल्टी और प्राप्त किराया। आगम को आय भी कहते हैं।
व्यय (Expenses) वे लागतें हैं जो व्यापार आगम कमाने की प्रक्रिया में करता है। सामान्यतः इन्हें लेखा अवधि में उपयोग हुई परिसंपत्तियों या सेवाओं की लागत से मापा जाता है, जैसे किराया, मज़दूरी, वेतन, ब्याज, मूल्यह्रास, बिजली, पानी, टेलीफ़ोन।
5. खर्च: आगम या पूँजीगत?
खर्च (Expenditure) का अर्थ है किसी लाभ, सेवा या संपत्ति के बदले पैसा ख़र्च करना या देयता उठाना, जैसे माल, मशीनरी या फर्नीचर की खरीद।
- अगर लाभ एक साल के अंदर ख़त्म हो जाए, तो खर्च को व्यय माना जाता है (इसे आगम खर्च (revenue expenditure) कहते हैं): जैसे इस महीने के दुकान किराये के ₹12,000।
- अगर लाभ एक साल से ज़्यादा चले, तो इसे परिसंपत्ति माना जाता है (इसे पूँजीगत खर्च (capital expenditure) कहते हैं): जैसे नए डिस्प्ले काउंटर के ₹45,000।
खर्च बड़ी छतरी है। इसके नीचे: कम समय वाला ख़र्च → व्यय; लंबे समय वाला ख़र्च → परिसंपत्ति। "हर व्यय खर्च है, पर हर खर्च व्यय नहीं।"
6. लाभ, अभिलाभ और हानि
लाभ (Profit): किसी अवधि के आगम का उससे संबंधित व्ययों पर आधिक्य। लाभ मालिक के निवेश (पूँजी) को बढ़ाता है।
अभिलाभ (Gain): ऐसा लाभ जो व्यापार की आनुषंगिक (मुख्य काम से हटकर) घटनाओं या लेन-देनों से होता है, जैसे स्थायी परिसंपत्ति को पुस्तक मूल्य से ज़्यादा में बेचना, मुकदमा जीतना, परिसंपत्ति के मूल्य में वृद्धि।
हानि (Loss): किसी अवधि के व्ययों का उससे संबंधित आगम पर आधिक्य। यह मालिक की पूँजी घटाती है। इसका अर्थ बिना किसी लाभ के खोया गया पैसा या पैसे के बराबर मूल्य भी है, जैसे चोरी या आग में गई रोकड़ या माल, और स्थायी परिसंपत्ति बेचने पर हानि।
| आधार | लाभ | अभिलाभ |
|---|---|---|
| स्रोत | मुख्य, नियमित व्यापारिक गतिविधि (माल ख़रीदना-बेचना) | आनुषंगिक या कभी-कभार की घटनाएँ |
| प्रकृति | आवर्ती, हर अवधि में अपेक्षित | अनावर्ती, कभी-कभार |
| उदाहरण | मोबाइल स्टोर फ़ोन बेचकर साल में व्ययों से ₹80,000 ज़्यादा कमाता है | मोबाइल स्टोर अपना पुराना डिलीवरी स्कूटर पुस्तक मूल्य से ₹5,000 ज़्यादा में बेचता है |
मेहता मोबाइल स्टोर ने दुकान में उपयोग के लिए (बेचने के लिए नहीं) ₹40,000 की एक डिस्प्ले मशीन ख़रीदी। एक साल बाद, जब उसका पुस्तक मूल्य अब भी ₹40,000 था, उसे ₹46,500 में बेच दिया। अभिलाभ की राशि निकालो।
7. बट्टा
बट्टा (Discount) बेचे गए माल के मूल्य में दी गई छूट है। यह दो प्रकार का होता है:
व्यापारिक बट्टा (Trade discount): बिक्री के समय सूची मूल्य पर तय प्रतिशत की छूट, जो सामान्यतः निर्माता थोक व्यापारियों को और थोक व्यापारी फुटकर व्यापारियों को देते हैं।
नकद बट्टा (Cash discount): देनदार को भुगतान के समय दी गई छूट, अगर वह तय अवधि में या उससे पहले भुगतान करे। यह जल्दी भुगतान का प्रोत्साहन है।
- व्यापारिक बट्टा = 20,000 का 10% = 2,000। बीजक राशि = 20,000 − 2,000 = ₹18,000।
- नकद बट्टा देय राशि (₹18,000) पर लगता है, सूची मूल्य पर नहीं: 18,000 का 2% = ₹360।
- चुकाई गई राशि = 18,000 − 360 = ₹17,640।
व्यापारिक बट्टा पुस्तकों में अलग से नहीं लिखा जाता; विक्रय या क्रय सीधे शुद्ध राशि (ऊपर ₹18,000) पर लिखा जाता है। नकद बट्टा लिखा जाता है (विक्रेता के लिए दिया गया बट्टा, क्रेता के लिए प्राप्त बट्टा)। और नकद बट्टा हमेशा व्यापारिक बट्टे के बाद वाली राशि पर निकलता है, सूची मूल्य पर कभी नहीं।
8. प्रमाणक, माल, क्रय और आहरण
प्रमाणक (Voucher): किसी लेन-देन के समर्थन में लिखित प्रमाण। जैसे नकद माल ख़रीदने पर कैश मेमो, उधार ख़रीदने पर बीजक (इनवॉइस), भुगतान करने पर रसीद।
माल (Goods): वे उत्पाद जिनका व्यापार करता है, यानी जिन्हें ख़रीदता और बेचता है, या बनाता और बेचता है। व्यापार में उपयोग के लिए ख़रीदी गई वस्तुएँ माल नहीं कहलातीं।
- (a) फर्नीचर विक्रेता कुर्सियाँ बेचने के लिए ख़रीदता है। ये उसका व्यापारिक माल हैं → माल (क्रय में लिखा जाएगा)।
- (b) किराना स्टोर कुर्सियाँ सालों तक उपयोग के लिए ख़रीदता है → फर्नीचर, एक परिसंपत्ति।
- वस्तु एक, व्यापार अलग, व्यवहार अलग। इसी तरह स्टेशनरी विक्रेता के लिए स्टेशनरी माल है, पर दूसरों के लिए यह व्यय है (क्रय नहीं)।
क्रय (Purchases): व्यापार द्वारा नकद और उधार, उपयोग या बिक्री के लिए ख़रीदे गए माल की कुल राशि। व्यापारिक संस्था माल दोबारा बेचने के लिए ख़रीदती है (प्रक्रिया के साथ या बिना); निर्माणी संस्था कच्चा माल ख़रीदकर उसे तैयार माल में बदलती और बेचती है। क्रय नकद या उधार हो सकता है।
आहरण (Drawings): मालिक द्वारा निजी उपयोग के लिए व्यापार से पैसा और/या माल निकालना। आहरण मालिक के निवेश (पूँजी) को घटाता है।
अगर रमेश अंकल बेटी की फ़ीस के लिए दुकान की रोकड़ से ₹5,000 लेते हैं, या परिवार के लिए दुकान से ₹800 का चावल घर ले जाते हैं, तो दोनों आहरण हैं।
9. स्टॉक
स्टॉक (रहतिया) (Stock / Inventory) किसी समय व्यापार के पास मौजूद माल, पुर्ज़ों और अन्य मदों का माप है (हाथ में स्टॉक)।
- अंतिम स्टॉक (Closing stock): व्यापारिक संस्था में लेखा अवधि के अंत में बिना बिका पड़ा माल। निर्माणी कंपनी में इसमें समापन तिथि पर मौजूद कच्चा माल, अर्ध-निर्मित माल और तैयार माल शामिल हैं।
- प्रारंभिक स्टॉक (Opening stock): लेखा अवधि की शुरुआत में स्टॉक। इस साल का अंतिम स्टॉक अगले साल का प्रारंभिक स्टॉक बनता है।
1 अप्रैल 2026 को शर्मा किराना स्टोर का प्रारंभिक स्टॉक ₹25,000 था। साल भर में ₹1,40,000 का माल ख़रीदा। ₹1,20,000 लागत का माल साल में बिका। 31 मार्च 2027 को अंतिम स्टॉक (लागत पर) कितना है?
10. देनदार और लेनदार
देनदार (Debtors) वे व्यक्ति या इकाइयाँ हैं जिन्हें उधार पर माल या सेवाएँ ख़रीदने के कारण उद्यम को राशि देनी है। समापन तिथि पर इनसे कुल बकाया तुलन पत्र के परिसंपत्ति पक्ष में विविध देनदार (व्यापारिक प्राप्य) के रूप में दिखाया जाता है।
लेनदार (Creditors) वे व्यक्ति या इकाइयाँ हैं जिन्हें उधार पर माल या सेवाएँ देने के कारण उद्यम को भुगतान करना है। इनका कुल बकाया देयता पक्ष में विविध लेनदार (व्यापारिक देय) के रूप में दिखाया जाता है।
| आधार | देनदार | लेनदार |
|---|---|---|
| अर्थ | व्यापार को पैसा देना है | व्यापार को उन्हें पैसा देना है |
| कब बनते हैं | माल/सेवा के उधार विक्रय से | माल/सेवा के उधार क्रय से |
| तुलन पत्र | परिसंपत्ति पक्ष (विविध देनदार) | देयता पक्ष (विविध लेनदार) |
| किराना उदाहरण | वर्मा परिवार उधार राशन ले गया | थोक व्यापारी ने 30 दिन के उधार पर चावल दिया |
देनदार = जिसे हमें देना है (वह हमें देगा)। लेनदार = जिसे हमसे लेना है (हम उसे देंगे)।
11. सब एक साथ
- पूँजी: मालिक द्वारा लगाई राशि = ₹3,00,000।
- स्थायी परिसंपत्तियाँ: फर्नीचर ₹60,000 और प्रिंटर ₹8,000 (उपयोग के लिए ख़रीदे, बेचने के लिए नहीं)।
- क्रय (माल): 1,50,000 नकद + 70,000 उधार = ₹2,20,000।
- विक्रय: 1,00,000 नकद + 40,000 उधार = ₹1,40,000।
- लेनदार: कपूर पेपर मार्ट, ₹70,000 (देयता)। देनदार: नेहा एंटरप्राइज़ेज़, ₹40,000 (परिसंपत्ति)।
- व्यय: वेतन 12,000 + किराया 9,000 + बिजली 2,500 = ₹23,500।
- आहरण: ₹5,000 (व्यापार की रोकड़ का निजी उपयोग)।
- अभिलाभ: प्रिंटर लागत 8,000 पर 9,500 में बिका → ₹1,500 (आनुषंगिक घटना)।
- हानि: चोरी में गई स्टेशनरी, ₹6,000 (बदले में कोई लाभ नहीं)।
ऊपर के अर्जुन स्टेशनर्स उदाहरण में अप्रैल 2026 के व्ययों और हानियों की कुल राशि कितनी है?
परीक्षा की तीन पुरानी गलतियाँ: (1) आहरण को व्यय लिखना (यह पूँजी में कमी है, व्यापार का व्यय नहीं); (2) फर्नीचर की खरीद को "क्रय" कहना ("क्रय" शब्द केवल माल के लिए है); (3) देनदारों को दिए गए बट्टे को आगम लिखना (विक्रेता के लिए यह व्यय/हानि है)।
- फर्नीचर (स्थायी परिसंपत्ति)
- क्रय (माल)
- व्यय
- आहरण
- पूँजी बढ़ाएगा
- व्यय बढ़ाएगा
- आहरण माना जाएगा और पूँजी घटाएगा
- चोरी से हानि माना जाएगा
📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)
- इकाई: व्यापार एक अलग इकाई; लेन-देन: इकाइयों के बीच मूल्य का आदान-प्रदान, नकद या उधार।
- परिसंपत्तियाँ (चालू व गैर-चालू) स्वामित्व वाले संसाधन हैं; देयताएँ (चालू व गैर-चालू) चुकाने वाले ऋण हैं; पूँजी मालिक का निवेश है, देयता पक्ष में दिखती है।
- खर्च = पैसा ख़र्च करना; लाभ एक साल में ख़त्म हो तो व्यय (आगम खर्च), वरना परिसंपत्ति (पूँजीगत खर्च)।
- लाभ मुख्य व्यापार से (आगम − व्यय); अभिलाभ आनुषंगिक घटनाओं से; हानि = व्ययों का आधिक्य या बिना लाभ के खोया पैसा।
- व्यापारिक बट्टा सूची मूल्य पर, पुस्तकों में नहीं लिखा जाता; नकद बट्टा जल्दी भुगतान पर, लिखा जाता है; आहरण पूँजी घटाता है।
- माल = जिन वस्तुओं का व्यापार होता है; देनदार व्यापार को देते हैं (परिसंपत्ति), लेनदारों को व्यापार देता है (देयता); अंतिम स्टॉक = अवधि के अंत में बिना बिका माल।
दबाने से आपकी प्रगति इसी फ़ोन/कंप्यूटर पर सेव होगी।