₹AccountsDostकक्षा 11 · लेखाशास्त्र 🔥 0⭐ 0
अध्याय 7 · पाठ 5 / 5 · ⏱ 35 मिनट

प्रावधान और संचय

🎯 इस पाठ के बाद आप यह कर पाओगे:
  • समझा पाओगे कि प्रावधान क्या है और संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान बना पाओगे
  • समझा पाओगे कि संचय क्या है और लाभ को सामान्य संचय में हस्तांतरित कर पाओगे
  • प्रावधान और संचय में, तथा आयगत और पूँजी संचय में अंतर कर पाओगे
  • गुप्त संचय, उसके बनने के तरीके और उस पर विवाद समझा पाओगे

एक समझदार दुकानदार पैसे के साथ दो होशियारी भरे काम करता है। पहला, अपने लाभ को “लाभ” कहने से पहले ही वह उन हानियों के लिए कुछ राशि अलग रख देता है जो उसे आती दिख रही हैं, जैसे वे ग्राहक जो शायद कभी भुगतान नहीं करेंगे। यह है प्रावधान (Provision)। दूसरा, लाभ पता चलने के बाद वह सारा लाभ घर नहीं ले जाता; कुछ हिस्सा बुरे समय या विस्तार के लिए व्यवसाय में ही रहने देता है। यह है संचय (Reserve)। दोनों शब्द मिलते-जुलते लगते हैं, और बोर्ड परीक्षा में इनका अंतर खूब पूछा जाता है। आज हम दोनों को प्रविष्टियों के साथ सीखेंगे, और फिर एक ऐसे “छिपे” संचय को देखेंगे जो तुलन-पत्र में दिखता ही नहीं।

1. प्रावधान क्या है?

खुर्जा की गुप्ता स्टेशनर्स 40 स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को उधार में कॉपियाँ और पेन बेचती है। 31 मार्च 2027 को ग्राहकों पर उसके ₹1,20,000 बकाया हैं। गुप्ता जी अनुभव से जानते हैं कि इसका छोटा-सा भाग कभी वापस नहीं आता: कोई कोचिंग सेंटर बंद हो जाता है, कोई ग्राहक शहर छोड़ देता है। वे ठीक-ठीक नहीं बता सकते कि कौन और कितना नहीं देगा, पर उन्हें पक्का पता है कि इस वर्ष की बिक्री से जुड़ी कुछ हानि होगी। अगर वे इसे अनदेखा करें तो इस वर्ष का लाभ असल से बड़ा दिखेगा।

प्रावधान: चालू वर्ष के लाभ पर लगाया गया वह भार जो किसी ज्ञात देयता, व्यय या हानि के लिए है, जो इसी वर्ष से संबंधित है पर जिसकी ठीक राशि निश्चित नहीं है।

इसे लाभ-हानि खाता नाम करके बनाया जाता है, इसलिए यह वर्ष का लाभ घटाता है। यह रूढ़िवादिता (विवेकशीलता) (Conservatism/Prudence) की अवधारणा पर चलता है: सभी संभावित हानियों के लिए प्रावधान करो। यह आगम और व्ययों का सही मिलान भी सुनिश्चित करता है।

प्रावधान के सामान्य उदाहरण:

  • मूल्यह्रास के लिए प्रावधान (पाठ 3)
  • डूबत एवं संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान
  • कर के लिए प्रावधान
  • देनदारों पर बट्टे के लिए प्रावधान
  • मरम्मत और नवीनीकरण के लिए प्रावधान

1.1 तुलन-पत्र में प्रावधान कहाँ दिखता है?

दिखाने का तरीकाउदाहरण
परिसंपत्ति पक्ष में संबंधित परिसंपत्ति में से घटाकरसंदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान (देनदारों में से); मूल्यह्रास प्रावधान (स्थायी परिसंपत्ति में से)
देयता पक्ष में, चालू देयताओं के साथकर के लिए प्रावधान; मरम्मत और नवीनीकरण के लिए प्रावधान

प्रावधान तब भी बनाना पड़ता है जब व्यवसाय को वर्ष में हानि हुई हो। संभावित हानि सच्ची है, लाभ ज़्यादा हो या कम; उसे अनदेखा करने से सही स्थिति छिप जाएगी।

2. संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान, कदम-दर-कदम

देनदार (वे ग्राहक जिन पर हमारा पैसा बकाया है) तीन समूहों में आते हैं:

  • अच्छे ऋण: वसूली निश्चित है।
  • डूबत ऋण (Bad Debts): वसूली असंभव, पक्की हानि। इन्हें अपलिखित किया जाता है: डूबत ऋण खाता नाम, देनदार के खाते से; बाद में लाभ-हानि खाता नाम, डूबत ऋण खाते से।
  • संदिग्ध ऋण (Doubtful Debts): ग्राहक भुगतान कर भी सकता है, पर पूरी राशि मिलने का भरोसा नहीं। अनुभव के आधार पर देनदारों का एक प्रतिशत संदिग्ध माना जाता है।

संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान, अभी तक अपलिखित न किए गए डूबत ऋण घटाने के बाद बचे देनदारों के प्रतिशत के रूप में निकाला जाता है।

लाभ-हानि खाता नाम   संदिग्ध ऋण प्रावधान खाते से

तुलन-पत्र में: देनदार (डूबत ऋण के बाद) − संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान।

नए डूबत ऋण हटाने से पहले वाले देनदारों पर प्रतिशत लगा देना। जो देनदार पहले से डूबत पता है वह अब “संदिग्ध” नहीं रहा; वह तो गया। हमेशा पहले घटाओ, फिर प्रतिशत लो।

31 मार्च 2027 को गुप्ता स्टेशनर्स का तलपट विविध देनदार ₹1,20,000 दिखाता है। अतिरिक्त सूचना: और डूबत ऋण ₹5,000 (अभी लिखे नहीं गए); देनदारों पर 5% की दर से संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान बनाओ। रोज़नामचा प्रविष्टियाँ करो और तुलन-पत्र में देनदार दिखाओ।
  1. डूबत ऋण अपलिखित करो: डूबत ऋण खाता नाम, विविध देनदार खाते से ₹5,000। देनदार हो गए 1,20,000 − 5,000 = ₹1,15,000।
  2. डूबत ऋण को लाभ-हानि खाते में बंद करो: ₹5,000।
  3. प्रावधान = 1,15,000 का 5% = ₹5,750: लाभ-हानि खाता नाम, संदिग्ध ऋण प्रावधान खाते से।
  4. तुलन-पत्र: विविध देनदार 1,15,000 घटाओ प्रावधान 5,750 = ₹1,09,250। लाभ-हानि खाते पर कुल भार = 5,000 + 5,750 = ₹10,750।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2027
मार्च 31
डूबत ऋण खाता नाम5,000
विविध देनदार खाते से5,000
(डूबत ऋण अपलिखित किए)
मार्च 31लाभ-हानि खाता नाम5,000
डूबत ऋण खाते से5,000
(डूबत ऋण लाभ-हानि खाते में हस्तांतरित किए)
मार्च 31लाभ-हानि खाता नाम5,750
संदिग्ध ऋण प्रावधान खाते से5,750
(₹1,15,000 पर 5% प्रावधान बनाया)
योग15,75015,750
तुलन-पत्र (परिसंपत्ति पक्ष): विविध देनदार ₹1,15,000 − संदिग्ध ऋण प्रावधान ₹5,750 = ₹1,09,250।

वर्ष के अंत में वर्मा मोबाइल स्टोर ₹3,200 का संदिग्ध ऋण प्रावधान बनाने का निर्णय लेता है। प्रविष्टि करो।

प्रावधान लाभ पर भार है। लाभ पर लगने वाले सारे भार कौन-सा खाता उठाता है?
संभावित हानि इस वर्ष का लाभ घटाती है, इसलिए लाभ-हानि खाता नाम होता है; प्रावधान (जो देनदारों में से घटेगा) जमा होता है। देनदार खाता जमा नहीं होता, क्योंकि अभी किसी खास ग्राहक ने भुगतान से मना नहीं किया।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2027
मार्च 31
लाभ-हानि खाता नाम3,200
संदिग्ध ऋण प्रावधान खाते से3,200
(संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान बनाया)

31 मार्च 2027 को विविध देनदार ₹90,000 हैं। ₹6,000 के और डूबत ऋण अपलिखित करने हैं और देनदारों पर 10% संदिग्ध ऋण प्रावधान रखना है। प्रावधान की राशि कितनी है (₹ में)?

पहले डूबत ऋण घटाओ।
बचे देनदार = 90,000 − 6,000 = 84,000। प्रावधान = 84,000 का 10% = ₹8,400। (लाभ-हानि खाते पर कुल भार = 6,000 + 8,400 = ₹14,400।)

3. संचय क्या है?

मान लो गुप्ता स्टेशनर्स इस वर्ष सारे व्यय और प्रावधान घटाने के बाद ₹4,00,000 का शुद्ध लाभ कमाती है। गुप्ता जी दो साल में दूसरी दुकान खोलना चाहते हैं। पूरा लाभ निकालने की बजाय वे उसका 10% व्यवसाय में ही रखने का निर्णय लेते हैं। वे ₹40,000 कोई व्यय नहीं हैं और कोई हानि भी अपेक्षित नहीं; यह बस व्यवसाय को मज़बूत बनाने के लिए रोका गया लाभ है। यही संचय है।

संचय: लाभ का वह भाग जो भविष्य की ज़रूरतों, जैसे वृद्धि, विस्तार या अज्ञात आकस्मिकताओं के लिए अलग रखकर व्यवसाय में रोक लिया जाता है।

संचय लाभ का विनियोजन (Appropriation of profit) है, लाभ पर भार नहीं। यह शुद्ध लाभ निकलने के बाद और केवल लाभ होने पर ही बनता है। तुलन-पत्र के देयता पक्ष में पूँजी के बाद संचय एवं आधिक्य (Reserves and Surplus) शीर्षक में दिखाया जाता है।

लाभ-हानि खाता नाम   सामान्य संचय खाते से

संचय के उदाहरण: सामान्य संचय, कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष, विनियोग उच्चावचन कोष, पूँजी संचय, लाभांश समकरण संचय, ऋणपत्र शोधन संचय।

2026-27 में गुप्ता स्टेशनर्स का प्रावधानों से पहले का लाभ ₹5,00,000 है। प्रावधान: संदिग्ध ऋण ₹20,000 और मूल्यह्रास ₹80,000। मालिक शुद्ध लाभ का 10% सामान्य संचय में हस्तांतरित करता है। निकालो (a) शुद्ध लाभ, (b) संचय में हस्तांतरण, (c) मालिक के लिए बचा लाभ।
  1. प्रावधान भार हैं, इसलिए पहले आते हैं: शुद्ध लाभ = 5,00,000 − 20,000 − 80,000 = ₹4,00,000।
  2. संचय इस शुद्ध लाभ का विनियोजन है: 4,00,000 का 10% = ₹40,000।
  3. मालिक के लिए बचा लाभ = 4,00,000 − 40,000 = ₹3,60,000।
(a) शुद्ध लाभ ₹4,00,000 (b) सामान्य संचय ₹40,000 (c) मालिक का भाग ₹3,60,000। संचय ने शुद्ध लाभ को नहीं घटाया; उसने केवल निकालने योग्य राशि घटाई।

गुप्ता स्टेशनर्स इस वर्ष के लाभ में से ₹40,000 सामान्य संचय में हस्तांतरित करती है। प्रविष्टि करो।

लाभ अलग रखा जा रहा है, खर्च नहीं हो रहा। लाभ किस खाते में है, और उसे कौन-सा खाता पाता है?
लाभ, लाभ-हानि खाते से निकाला जाता है (नाम) और सामान्य संचय में रखा जाता है (जमा)। कोई नकद नहीं हिलता और किसी को भुगतान नहीं होता।
तिथिविवरणब.पृ.सं.नाम राशि (₹)जमा राशि (₹)
2027
मार्च 31
लाभ-हानि खाता नाम40,000
सामान्य संचय खाते से40,000
(लाभ सामान्य संचय में हस्तांतरित किया)

प्रावधानों से पहले का लाभ ₹6,00,000 है। कर के लिए प्रावधान ₹1,50,000 और मूल्यह्रास प्रावधान ₹50,000 बनाने हैं, और फिर शुद्ध लाभ का 10% सामान्य संचय में हस्तांतरित करना है। मालिक के लिए कितना लाभ बचता है (₹ में)?

पहले भार (प्रावधान), बाद में विनियोजन (संचय)।
शुद्ध लाभ = 6,00,000 − 1,50,000 − 50,000 = 4,00,000। संचय = 4,00,000 का 10% = 40,000। मालिक के लिए बचा = 4,00,000 − 40,000 = ₹3,60,000।

प्रावधान = लाभ से प्रारंभ में (शुद्ध लाभ निकलने से पहले लगता है)। संचय = लाभ का संभालकर रखा हिस्सा (शुद्ध लाभ निकलने के बाद रोका जाता है)।

4. प्रावधान और संचय में अंतर

आधारप्रावधानसंचय
मूल प्रकृतिलाभ पर भार; इसे नाम किए बिना शुद्ध लाभ नहीं निकलतालाभ का विनियोजन; शुद्ध लाभ निकलने के बाद बनता है
उद्देश्यचालू अवधि की ज्ञात देयता या व्यय के लिए, जिसकी राशि अनिश्चित हैवित्तीय स्थिति मज़बूत करने के लिए; कुछ संचय कानूनन अनिवार्य हैं
कर योग्य लाभ पर प्रभावकर योग्य लाभ घटाता हैकोई प्रभाव नहीं (कर के बाद के लाभ से बनता है)
तुलन-पत्रसंबंधित परिसंपत्ति में से घटाकर, या चालू देयताओं के साथदेयता पक्ष में पूँजी के बाद संचय एवं आधिक्य में
अनिवार्यताबनाना ज़रूरी (विवेकशीलता), हानि होने पर भीसामान्यतः प्रबंधन की इच्छा पर; लाभ के बिना नहीं बन सकता (कुछ, जैसे ऋणपत्र शोधन संचय, कानूनन ज़रूरी)
लाभांशलाभांश देने में उपयोग नहीं हो सकतासामान्य संचय से लाभांश दिया जा सकता है
प्रावधान के बारे में कौन-सा कथन सही है?
  • यह केवल लाभ होने पर ही बनता है
  • यह लाभ पर भार है और कर योग्य लाभ घटाता है
  • यह पूँजी के बाद संचय एवं आधिक्य में दिखाया जाता है
  • इससे लाभांश दिया जा सकता है
प्रावधान शुद्ध लाभ निकलने से पहले लाभ-हानि खाते में नाम होता है, इसलिए कर योग्य लाभ घटाता है। बाकी तीन कथन संचय का वर्णन करते हैं (और प्रावधान तो हानि वाले वर्ष में भी बनाना पड़ता है)।

5. संचय के प्रकार

5.1 उद्देश्य के अनुसार: सामान्य और विशिष्ट

  • सामान्य संचय (General Reserve) (मुक्त संचय): कोई खास उद्देश्य तय नहीं, इसलिए प्रबंधन इसे किसी भी काम में ले सकता है। यह व्यवसाय की कुल वित्तीय स्थिति मज़बूत करता है।
  • विशिष्ट संचय (Specific Reserve): एक तय उद्देश्य के लिए बनता है और केवल उसी में उपयोग हो सकता है:
    • लाभांश समकरण संचय: अधिक लाभ वाले वर्षों में रखा गया पैसा, ताकि कम लाभ वाले वर्षों में लाभांश की दर स्थिर रहे।
    • कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष: कर्मचारियों के दावों के लिए, जैसे दुर्घटना के बाद।
    • विनियोग उच्चावचन कोष: विनियोगों (निवेशों) के बाज़ार मूल्य में गिरावट की भरपाई के लिए।
    • ऋणपत्र शोधन संचय: ऋणपत्रों के भुगतान के लिए धन जुटाने हेतु।

5.2 लाभ के स्रोत के अनुसार: आयगत और पूँजी

  • आयगत संचय (Revenue Reserve): आयगत लाभों से बनता है, यानी सामान्य संचालन गतिविधियों (खरीदना, बेचना, सेवा देना) के लाभ से। ऐसे लाभ वैसे लाभांश के लिए उपलब्ध होते हैं। उदाहरण: सामान्य संचय, कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष, विनियोग उच्चावचन कोष, लाभांश समकरण संचय, ऋणपत्र शोधन संचय।
  • पूँजी संचय (Capital Reserve): मुख्यतः पूँजीगत लाभों से बनता है, जो सामान्य संचालन से नहीं आते और लाभांश के लिए उपलब्ध नहीं होते। पूँजीगत लाभों के उदाहरण: अंशों या ऋणपत्रों के निर्गमन पर प्रीमियम, स्थायी परिसंपत्तियों की बिक्री पर लाभ, ऋणपत्रों के शोधन पर लाभ, स्थायी परिसंपत्तियों व देयताओं के पुनर्मूल्यांकन पर लाभ, समामेलन से पूर्व के लाभ, ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गमन पर लाभ। पूँजी संचय पूँजीगत हानियों को अपलिखित करने में या कंपनी में बोनस अंश जारी करने में उपयोग होता है।
आधारआयगत संचयपूँजी संचय
स्रोतसामान्य संचालन के आयगत लाभ, जो वैसे लाभांश के लिए उपलब्ध हैंमुख्यतः पूँजीगत लाभ, जो सामान्य संचालन से नहीं आते और लाभांश के लिए उपलब्ध नहीं (आयगत लाभ भी लगाए जा सकते हैं)
उद्देश्यवित्तीय स्थिति मज़बूत करना, अप्रत्याशित आकस्मिकताओं या किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिएकानूनी आवश्यकताओं या लेखांकन परंपराओं के पालन के लिए
उपयोगविशिष्ट संचय केवल अपने उद्देश्य में; सामान्य संचय किसी भी काम में, लाभांश सहितकेवल कानून द्वारा अनुमत कामों में, जैसे पूँजीगत हानि अपलिखित करना, बोनस अंश जारी करना

लाभांश समकरण संचय एक विशिष्ट आयगत संचय है, सामान्य संचय नहीं, भले ही उसका पैसा सामान्य लाभ से आया हो। और “पूँजी संचय” मालिक की “पूँजी” नहीं है; यह व्यवसाय में रखा गया पूँजीगत प्रकृति का लाभ है।

5.3 संचय क्यों ज़रूरी हैं

संचय व्यवसाय को भविष्य के अज्ञात व्ययों और हानियों से बचाते हैं, विस्तार जैसी बड़ी ज़रूरतों के लिए साधन बचाते हैं (मालिक सब कुछ न निकालें), और ऋणपत्र जैसी दीर्घकालीन देयताएँ चुकाने में मदद करते हैं। संक्षेप में, संचय व्यवसाय की बचत हैं।

6. गुप्त संचय

गुप्त संचय (Secret Reserve): ऐसा संचय जो तुलन-पत्र में दिखाई नहीं देता। व्यवसाय जान-बूझकर अपनी परिसंपत्तियाँ असल मूल्य से कम (या देयताएँ अधिक) दिखाता है, जिससे दिखाया गया लाभ और शुद्ध मूल्य असल से कम हो जाते हैं। बाहरी लोग इसे देख नहीं पाते, इसलिए “गुप्त”।

यह इन तरीकों से बनता है:

  • आवश्यकता से अधिक मूल्यह्रास लगाकर;
  • स्टॉक (रहतिया) का कम मूल्यांकन करके;
  • पूँजीगत खर्च को लाभ-हानि खाते में डालकर;
  • संदिग्ध ऋणों के लिए अत्यधिक प्रावधान करके;
  • संभावित (आकस्मिक) देयताओं को वास्तविक देयता के रूप में दिखाकर।

कोई लाभ क्यों छिपाएगा? इससे दिखाया गया लाभ (और इसलिए कर) कम होता है, और बुरे वर्ष में छिपी राशि लाभ में वापस लाकर बेहतर परिणाम दिखाया जा सकता है। यह प्रतिस्पर्धियों को यह देखने से भी रोकता है कि व्यवसाय असल में कितना लाभदायक है। उचित सीमा में इसे विवेकशीलता और सुविधा के आधार पर उचित माना जाता है; उससे आगे यह खातों के उपयोगकर्ताओं को भ्रमित करता है, इसीलिए गुप्त संचय का आकार अंकेक्षण में एक संवेदनशील मुद्दा है।

मेहता इलेक्ट्रॉनिक्स ने ₹4,00,000 लागत की मशीन पर 25% मूल्यह्रास लगाया, जबकि उचित दर 10% है; ₹60,000 के देनदारों पर 10% प्रावधान बनाया, जबकि 5% काफ़ी था; और ₹1,50,000 मूल्य के स्टॉक का मूल्यांकन ₹1,30,000 किया। इस वर्ष बना गुप्त संचय निकालो।
  1. अधिक मूल्यह्रास = 4,00,000 का 25% − 4,00,000 का 10% = 1,00,000 − 40,000 = ₹60,000।
  2. अधिक प्रावधान = 60,000 का 10% − 60,000 का 5% = 6,000 − 3,000 = ₹3,000।
  3. स्टॉक का कम मूल्यांकन = 1,50,000 − 1,30,000 = ₹20,000।
गुप्त संचय = 60,000 + 3,000 + 20,000 = ₹83,000। दिखाया गया लाभ असल लाभ से ₹83,000 कम है।
इनमें से कौन-सा गुप्त संचय नहीं बनाता?
  • अंतिम स्टॉक का मूल्यांकन उसकी लागत और बाज़ार मूल्य दोनों से कम करना
  • नए कंप्यूटर को कार्यालय व्यय के रूप में अपलिखित करना
  • आवश्यकता से बहुत बड़ा संदिग्ध ऋण प्रावधान बनाना
  • लाभ में से ₹50,000 सामान्य संचय में हस्तांतरित करना
सामान्य संचय में हस्तांतरण तुलन-पत्र में संचय एवं आधिक्य के अंतर्गत खुले रूप से दिखता है, इसलिए यह गुप्त नहीं है। बाकी तीन परिसंपत्तियाँ या लाभ कम दिखाकर मूल्य छिपाते हैं।

📌 याद रखने वाली बातें (त्वरित दोहराव)

  • प्रावधान: इस वर्ष की ज्ञात देयता/हानि के लिए लाभ पर भार, जिसकी राशि अनिश्चित है; लाभ-हानि खाता नाम, प्रावधान खाते से; विवेकशीलता के कारण हानि वाले वर्ष में भी ज़रूरी।
  • संदिग्ध ऋण प्रावधान = और डूबत ऋण अपलिखित करने के बाद बचे देनदारों का %; तुलन-पत्र में देनदारों में से घटता है।
  • संचय: भविष्य की ज़रूरतों के लिए रोका गया लाभ का विनियोजन; लाभ-हानि खाता नाम, सामान्य संचय खाते से; संचय एवं आधिक्य में दिखता है।
  • प्रावधान कर योग्य लाभ घटाता है और लाभांश में उपयोग नहीं होता; संचय कर योग्य लाभ पर असर नहीं डालता और सामान्य संचय से लाभांश दिया जा सकता है।
  • संचय: सामान्य बनाम विशिष्ट; आयगत (संचालन लाभ से) बनाम पूँजी (पूँजीगत लाभ से, लाभांश के लिए नहीं)।
  • गुप्त संचय: परिसंपत्ति या लाभ कम दिखाकर छिपाया जाता है (अधिक मूल्यह्रास, स्टॉक का कम मूल्य, अत्यधिक प्रावधान)।

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